Monday, November 30, 2020

दिल की दुविधा-प्रेम बजाज




हरीश बजाज प्राइवेट दफ़्तर में क्लर्क बाबु की नौकरी , दो बेटे, बड़ा गौरव , छोटा सौरभ मन में चाह कि बच्चों को अपने जैसा क्लर्क नहीं बनाना , इसलिए ओवर टाइम भी करता था , पत्नी भी लोगों के कपड़े सिला करती थी , ताकि बच्चों को अच्छी तालीम दे सके ।
दोनों बेटे पढ़-लिखकर ऊंची पोस्ट पर बड़ी-बड़ी कम्पनियों में नौकरी करने लगे पिता ने रिटायर होने के बाद दोनों बेटों में सबकुछ बांट दिया ।

सुनो," सब कुछ मत बांटो बच्चों में कुछ तो अपने लिए रखो , कल को अपने बुढ़ापे के लिए"!
"तुम तो ऐसे ही चिंता करती हो बुढ़ापे के लिए बच्चे हैं ना हमें किस बात की चिंता"!
शुरू में दोनों बच्चों ने खूब प्यार दिखाया फिर पुश्तैनी घर भी जब बंट गया दोनों में , मां - बाप ने सोचा, चलो अब बच्चों के साथ ही रहा जाए , कभी एक के कभी दूसरे के पास। गौरव दिल्ली , सौरभ मुम्बई हरीश ने दोनों बेटों से बात की।
गौरव, "सौरभ क्या तुम दोनों को रख सकते हो ? मेरा तो मुश्किल है इतनी मंहगाई उस पर से बच्चों की भी अब बड़ी क्लासे हैं उनके भी तो खर्चे हैं"!
"तो भैया मेरा भी तो यही हाल है"!
" तो ऐसा करते हैं एक को तुम रखो एक को मैं"!
" हां ये ठीक रहेगा , ना आप पर ज्यादा बोझ पड़ेगा ना मुझ पर ‌ पापा को मैं रख लेता हूं आप मां को ले जाओ"!
लाचार मां - बाप दो हिस्सों में बंट गए, कुछ समय बाद हरीश की तबीयत बहुत बिगड़ गई, डाक्टर ने बताया कुछ पता नहीं कब तक हैं।
दोनों की इच्छा है कि अंतिम समय में तो साथ रहे, लेकिन दोनों को रखने के लिए कोई राज़ी नहीं।
"गौरव बेटा, तेरे पापा का कुछ पता नहीं कब क्या हो जाए, हम चाहते हैं अन्तिम समय में हम साथ रहे"!
"मां आप जानते हो दो का खर्च ना मैं उठा सकता हूं ना सौरभ और फोन पर तो रोज़ बात कर ही लेते हो। ज्यादा है तो आप मेरे फ़ोन से वीडियो काल कर लिया करो लो मैं अभी आपकी बात कराता हूं"!
फ़ोन पर दोनों विडियो काल पर बात कर रहे हैं ।
हरीश ... "आशा तुम्हें देख कर बहुत मन खुश हो गया, ऐसा लग रहा है जैसे हर एक - दुजे के पास हैं"!
"हम पास ही तो हैं दूर कहां है, ये तो सिर्फ राहों की दूरियां हैं दिलों की नहीं"!
"आशा तुम्हें याद है, कभी - कभी तुम एक गीत गुनगुनाया करती थी"!
" वो मैं कैसे भूल सकती हूं अब तो हर पल वहीं गीत गुनगुनाती हूं"
"आज फिर से वही गीत सुनने का मन है, मैं भी तुम्हारे साथ गाऊंगा"
दोनों गाने लगते हैं .......
##तेरे बिना ज़िंदगी से शिकवा तो नहीं , शिकवा नहीं , शिकवा नहीं , तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन ज़िन्दगी तो नहीं ##
गाते -गाते हरीश ख़ामोश हो गए,  आगे तो गाईये भूल गए क्या,  गौरव के पापा बोलिए ना क्या हुआ, लेकिन वो तो खामोश हो गए सदा के लिए और इसके साथ ही आशा  की आत्मा भी विलिन हो गई परमात्मा में!
 यह देख गौरव रो रहा है, गौरव का बेटा साहिल .... ‌ पापा ……… "क्यों रो रहे हैं आप , अब तो कोई दूविधा ही नहीं रही कि दोनों को एक साथ कैसे रखें, लेकिन मेरे  दिल में एक दूविधा है, क्या दादू - दादी को वहां  भी अलग -अलग रखा जाएगा या वहां दोनों एक साथ रह सकते हैं ,साहिल की  आंखों में बहुत से सवाल नज़र आए गौरव को, लेकिन वो उसके  दिल की दूविधा को  मिटाने में असमर्थ था।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

Sunday, November 29, 2020

जब प्यार किसी से होता है-प्रेम बजाज

जब प्यार किसी से होता है


जब प्यार किसी से होता है , इक अजीब सा ख़ुमार होता है ।
मस्ती का आलम रहता है हर पल , दिल बेकरार होता है ।

होता है यार नकाब में फिर भी शौक़े - दीद रहती है हर पल
नज़रों से नज़रें मिलती हैं , आंखों में अश्क बेशुमार होता है ।

हर पल बेकरार रहती है ज़ुबां , करने को राज़ - ए- इश्क ब्यां
मगर इश्क वो बला है ज़ालिम कि ज़ुबां से ना इकरार होता है ।

सीने में होती है सरसराहट , हर पल महसूस होती है उनकी
आहट , झूमता है दिल नशे में ,जब इश्क बेशुमार होता है ।

सताती है *प्रेम * को हर पल यार की याद, तड़पती है रातों में
ना सुकुन मिलता है रातों में , ना दिन में ना करार होता है ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Thursday, November 26, 2020

फेसबुकिया प्यार ख़तरनाक-प्रेम बजाज



आक्षी को फेसबुक पे रोहित नाम के लड़के से प्यार हो गया ।
रोहित ग़ैर जात था, दोनों के माता-पिता नहीं मानेंगे, इसलिए रोहित के कहने पर आक्षी घर से भाग कर रोहित के पास पहुंच गई।
रोहित ने धोखा दिया, उससे शादी ना करके उसे कोठे पर बेच दिया। आक्षी ने कोठेवाली से मिन्नतें की कि उसे छोड़ दें , उसे इस दलदल में ना धकेले, लेकिन कोठेवाली ने उसकी एक ना सुनी, और उसे एक कमरे में बंद कर दिया, आक्षी खिड़की से भाग गई और ट्रेन की पटरी पर लेट गई।
संजय वहां से निकला, उसे पटरी पर लेटा देखकर, "आप आत्महत्या क्यूं कर रही है ??
आक्षी सारी बात बताती है और कहती है, अब किस मुंह से घर जाउंगी ?
संजय उसे समझाता है कि उसे इस तरह के प्यार पर विश्वास नहीं करना चाहिए था, जो इन्सान चन्द दिन पहले मिला, उसके लिए मां- बाप को छोड़ देना बेवकूफी है ।
ऐसे फेसबुकिया प्यार कभी सच्चे नहीं होते, इन पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं करना चाहिए ।
संजय आक्षी को घर छोड़ने जाता है, आक्षी के माता-पिता, बेटी को गले लगाते है, और संजय का शुक्रिया करते हैं "" थैंक्यू बेटा तुमने हमारी इज़्ज़त बचा ली। हमारी बेटी की जान बचाकर हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है । और इस तरह उसे ढेर सारी दुआएं देते हैं" ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

ये है प्यार की इंतेहा-प्रेम बजाज




दिल्ली शहर में राहुल एक अच्छे धनी परिवार से संबंध रखता था , शीना साधारण परिवार से थी लेकिन खूबसूरती देखते बनती थी , भरा-पूरा बदन , गोरा - चिट्टा रंग , तीखे नैन-नक्श , जो देखे तो पलक झपकना भूल जाए ।
राहुल भी ऊंचे कद-काठी का चौड़ा सीना , गेहुंआ रंग , जचता था , उस पर पैसे का घमण्ड तो तू भी नही गया ।
दोनों में अच्छी दोस्ती थी , ना जाने कब ये दोस्ती प्यार में बदल गई ।

# बढ़ जाए त्रिश्नगी जब हद से तो जां पर बन आती है
छलकते है लबों के जाम तो प्यास और बढ़ जाती है #
इसी तरह जोश-ए-जवानी ने वो काम किया , एक तुफ़ान आया और सबकुछ बहा कर ले गया ।
राहुल बहुत ग़लत हुआ , शादी से पहले ये ठीक नहीं ।
शीना मैं जानता हूं हमसे गलती हो गई , लेकिन हमारा प्यार सच्चा है , हमें किस बात का डर ।
मैं आज ही अपने मम्मी-पापा को तुम्हारे घर भेजता हूं हमारी शादी की बात करने के लिए ।
लेकिन एक सप्ताह बाद तो तुम अमेरिका जा रहे हो ।
तुम टेंशन मत लो जाने से पहले हमारी शादी हो जाएगी , हम बिल्कुल सिंपल सी शादी करेंगे और जब मैं वापिस आ जाऊंगा फिर हम एक फंक्शन कर लेंगे ‌।
राहुल के मम्मी-पापा शीना के घर जाकर बात करते हैं ,जब शादी की तारीख निकलवाने के लिए पंडित के पास गए तो पंडित ने बताया कि 6 महीने तक शादी का मुहूर्त नहीं । दोनों मन मार कर रह जाते हैं ।
राहुल एक सप्ताह बाद अमेरिका चला गया अपनी काम के सिलसिले में , इधर शीना भी अपनी नौकरी में व्यस्त है । दो महीने बाद शीना को पता चलता है कि वे मां बनने वाली है । राहुल के मम्मी-पापा को बताया जाता है तो वो मानने से इंकार कर देते हैं कि राहुल ही इस बच्चे का पिता है , और वो रिश्ते से भी इन्कार कर देते हैं ।
शीना अपने प्यार को मारना नहीं चाहती इसलिए वो दिल्ली छोड़कर मुम्बई चली जाती है और एक प्यारी सी गुड़िया को जन्म देती है ‌।
उधर राहुल को उसके मम्मी-पापा बताते हैं कि शीना इंतजार नहीं कर सकी और शादी कर ली ‌।
शीना की ज़िंदगी ख़राब ना हो इसलिए राहुल उससे कभी बात नहीं करता । शीना भी राहुल की शादी की बात सच मान कर राहुल को फोन नहीं करती । लेकिन दोनों को विश्वास है कि एक दिन वो ज़रूर मिलेंगे और जानना चाहेंगे कि क्यों किया ऐसा ।
शीना बेटी का नाम राशी , अर्थात दोनों का नाम जोड़ कर ( राहुल +शीना ) रखती है , वह अपनी बेटी में राहुल की झलक देख कर जी रही है कि अचानक शीना बीमार हो जाती है , पता चलता है कि शीना को ब्लड कैंसर है , दस साल की बेटी , कोई रास्ता नहीं तो दिल्ली वापिस मां- पापा के पास आ जाती है ‌।
राहुल इंडिया वापिस नहीं आना चाहता था , लेकिन उसके पापा बहुत बीमार हो गए ,और वो मिलने आ रहा है और रास्ते में क्या देखता है कि शाम का समय एक 15 साल की खूबसूरत लड़की जिसे दो लड़कों ने घेरा है और वो डंक कर उनका मुकाबला कर रही है ।
राहुल ये देख कर प्रभावित होता है ।
बहुत बढ़िया बेटा , ऐसे लोगों कि यही हश्र होना चाहिए , हम तो आप की बहादुरी के कायल हो गए बेटा , क्या हम आप के मम्मी-पापा से मिल सकते हैं , आप को घर भी छोड़ देंगे ।
राहुल राशी को घर छोड़ने जाता है तो शीना को देख अवाक रह जाता है ‌, और वहीं पर ही शीना के माता-पिता से पता चलता है कि राशी राहुल की ही बेटी है और शीना के कैंसर का भी पता चलता है ।
शीना मैं तुम्हारा गुनाहगार हूं , मुझे लगा सचमुच तुमने शादी कर ली , और तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई बवाल ना हो , इसलिए ना तो तुम्हारे फोन का जवाब दिया , और ना ही मैंने फोन किया । लेकिन अब नहीं , चलो अपने घर ।
राहुल शीना की मांग भरता है और घर ले आता है । और माता- पिता को समझाता है कि शीना और राशी ही उसकी ज़िंदगी हैं । राहुल के माता-पिता समझ जाते हैं और उन्हें भी अपनी गलती का एहसास होता है । राहुल के पापा अब ठीक हो गए हैं , और सब मिलजुल कर अच्छे से रह रहे हैं की अचानक शीना की तबीयत बिगड़ जाती है , और डाक्टर बता देते हैं कि शीना का आखिरी समय आ गया है , लगभग एक सप्ताह के पश्चात शीना राहुल की गोद में अंतिम सांसें लेते हुए विदा हो जाती है , लेकिन उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कुराहट होती है । कि उसने राहुल की अमानत उसे सोंप दी , और साथ ही साथ उसके इंतजार का भी अंत हुआ , आज वो अपने प्यार की बाहों में आखिरी सांस ले रही है । यही होती है प्यार की इंतहा ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Sunday, November 22, 2020

रिश्तों की अहमियत-प्रेम बजाज




मात-पिता के रिश्ते की जो ना जाने कद्र वो कुलांगार है ,
सच्चा रिश्ता वो होता है जो रिश्तों की माला करता कण्ठागार है ,
रिश्तों को रखें उलझाए हर पल जो वो रिश्तों का कसूरवार है ,
कभी हद से बढ़ जाती उलझन रिश्तों में तो लगता कारागार है।

रिश्तों को निभाना होता है दिल से यहां ना कोई रिश्तों का कामगार है ,
जब कूट- कूट भरा होता है प्यार- विश्वास वहां दिल बनता रिश्तों का ओगार है ,
ना उलझनें देना कभी रिश्तों को , ये रिश्ते खुशी के तलबगार है,
जो सींचे प्यार के पानी से रिश्ते के पौधे वो ही करूणागार है ।

जो ना समझो पाया अहमियत रिश्तों की उसका जीवन कगार है,
वो रहता ताउम्र जिंदगी से शर्मसार है,
इन प्यारे-प्यारे रिश्तों से मुंह मोड़ना तो बेकार है,
परवरदिगार ने बक्शे हैं ये प्यारे रिश्ते इन्हें निभाने वाले हम तो बस किरदार हैं।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Saturday, November 21, 2020

संडे स्पेशल कहानी-चिन्ता



           
एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।

राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।

विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई। कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियां यहां क्यों रखी हैं? संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो सिर्फ भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।

सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं। अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जाएगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।

ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है। उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जबकि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। सिर्फ कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता, संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।

अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं। उसको (भगवान) हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं।

कभी आप बहुत परेशान हों, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो तो आप आँखें बंद करके विश्वास के साथ उस परमात्मा को पुकारें जिसने आपको यह सुन्दर मनुष्य जीवन दिया है, सच मानिये थोड़ी देर में आपकी समस्या का समाधान मिल जायेगा।


Thursday, November 19, 2020

सुहाग ज़िन्दा रहे , वहीं असली मंगलसूत्र-प्रेम बजाज

धन-लक्ष्मी



रीटा के ससुर को अचानक रात को छाती में दर्द हुआ , डाक्टर के पास जाने पर पता चला कि सिरियस हार्ट अटैक है , और सर्जरी होगी वो भी दिल्ली जाना होगा , जिस के लिए लगभग तीन लाख रूपए का खर्च होगा ।
रीटा के पति अकेले बेटे हैं किसी और का सहारा भी नहीं और उन दिनों लेबर की स्ट्राइक के चलते काम पे भी काफी बुरा असर पड़ रहा था ।
सर्जरी भी जरूरी , उनकी जान को ख़तरा था , लेकिन इतने पैसे कहां से आए , रीटा के पति राहुल ने डाक्टर को तो सर्जरी के लिए कह दिया लेकिन बहुत परेशान थे ।
बोले किसी दोस्त से करता हूं बात अगर कोई उधार दे दे तो , रीटा की सास बोली मेरा मंगलसूत्र सैट के अलावा कोई गहना नहीं मेरे पास , वहीं ले जाकर बेच दो , सुहाग ज़िन्दा रहे , वहीं असली मंगलसूत्र है।
रीटा ने उसी समय अपने पति के हाथ पर एक एफ. डी. दो लाख की और अपनी पासबुक जिसमें लगभग सत्तर- अस्सी हजार रुपए थे , पकड़ा दी।
रीटा का पति और सास उसे बड़ी हैरानी से देख रहे थे कि इतने पैसे वो कहां से लाई ?
वो बस इतना कह पाई कि "" ये मेरी बचत है ।
मम्मी जी ने उस समय उसे गले से लगा लिया, और बोली बेटी मुझे क्षमा करना , तुम हर महीने जब भी पहली तारीख को बजट बनाने लगती थी तो हर बार मैं तुम्हें यही बोलती थी कि ना जाने ये क्या बही- खाते लेकर बैठ जाती है ,इससे क्या होगा , जो है खर्च करो हिसाब- किताब क्या लिखना ।
और तुम हर बार यही कहती ... मम्मी जी बजट बनाकर चलना चाहिए ,और आने वाले बुरे या अच्छे समय के लिए कुछ ना कुछ सेविंग अवश्य होनी चाहिए , तुम सही कहती थी।
तुम तो सचमुच मेरी आज धन- लक्ष्मी बन गई।
आज से मैं तुम्हें धन- लक्ष्मी ही कहूंगी।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है । तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण ...