Monday, November 30, 2020

दिल की दुविधा-प्रेम बजाज




हरीश बजाज प्राइवेट दफ़्तर में क्लर्क बाबु की नौकरी , दो बेटे, बड़ा गौरव , छोटा सौरभ मन में चाह कि बच्चों को अपने जैसा क्लर्क नहीं बनाना , इसलिए ओवर टाइम भी करता था , पत्नी भी लोगों के कपड़े सिला करती थी , ताकि बच्चों को अच्छी तालीम दे सके ।
दोनों बेटे पढ़-लिखकर ऊंची पोस्ट पर बड़ी-बड़ी कम्पनियों में नौकरी करने लगे पिता ने रिटायर होने के बाद दोनों बेटों में सबकुछ बांट दिया ।

सुनो," सब कुछ मत बांटो बच्चों में कुछ तो अपने लिए रखो , कल को अपने बुढ़ापे के लिए"!
"तुम तो ऐसे ही चिंता करती हो बुढ़ापे के लिए बच्चे हैं ना हमें किस बात की चिंता"!
शुरू में दोनों बच्चों ने खूब प्यार दिखाया फिर पुश्तैनी घर भी जब बंट गया दोनों में , मां - बाप ने सोचा, चलो अब बच्चों के साथ ही रहा जाए , कभी एक के कभी दूसरे के पास। गौरव दिल्ली , सौरभ मुम्बई हरीश ने दोनों बेटों से बात की।
गौरव, "सौरभ क्या तुम दोनों को रख सकते हो ? मेरा तो मुश्किल है इतनी मंहगाई उस पर से बच्चों की भी अब बड़ी क्लासे हैं उनके भी तो खर्चे हैं"!
"तो भैया मेरा भी तो यही हाल है"!
" तो ऐसा करते हैं एक को तुम रखो एक को मैं"!
" हां ये ठीक रहेगा , ना आप पर ज्यादा बोझ पड़ेगा ना मुझ पर ‌ पापा को मैं रख लेता हूं आप मां को ले जाओ"!
लाचार मां - बाप दो हिस्सों में बंट गए, कुछ समय बाद हरीश की तबीयत बहुत बिगड़ गई, डाक्टर ने बताया कुछ पता नहीं कब तक हैं।
दोनों की इच्छा है कि अंतिम समय में तो साथ रहे, लेकिन दोनों को रखने के लिए कोई राज़ी नहीं।
"गौरव बेटा, तेरे पापा का कुछ पता नहीं कब क्या हो जाए, हम चाहते हैं अन्तिम समय में हम साथ रहे"!
"मां आप जानते हो दो का खर्च ना मैं उठा सकता हूं ना सौरभ और फोन पर तो रोज़ बात कर ही लेते हो। ज्यादा है तो आप मेरे फ़ोन से वीडियो काल कर लिया करो लो मैं अभी आपकी बात कराता हूं"!
फ़ोन पर दोनों विडियो काल पर बात कर रहे हैं ।
हरीश ... "आशा तुम्हें देख कर बहुत मन खुश हो गया, ऐसा लग रहा है जैसे हर एक - दुजे के पास हैं"!
"हम पास ही तो हैं दूर कहां है, ये तो सिर्फ राहों की दूरियां हैं दिलों की नहीं"!
"आशा तुम्हें याद है, कभी - कभी तुम एक गीत गुनगुनाया करती थी"!
" वो मैं कैसे भूल सकती हूं अब तो हर पल वहीं गीत गुनगुनाती हूं"
"आज फिर से वही गीत सुनने का मन है, मैं भी तुम्हारे साथ गाऊंगा"
दोनों गाने लगते हैं .......
##तेरे बिना ज़िंदगी से शिकवा तो नहीं , शिकवा नहीं , शिकवा नहीं , तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन ज़िन्दगी तो नहीं ##
गाते -गाते हरीश ख़ामोश हो गए,  आगे तो गाईये भूल गए क्या,  गौरव के पापा बोलिए ना क्या हुआ, लेकिन वो तो खामोश हो गए सदा के लिए और इसके साथ ही आशा  की आत्मा भी विलिन हो गई परमात्मा में!
 यह देख गौरव रो रहा है, गौरव का बेटा साहिल .... ‌ पापा ……… "क्यों रो रहे हैं आप , अब तो कोई दूविधा ही नहीं रही कि दोनों को एक साथ कैसे रखें, लेकिन मेरे  दिल में एक दूविधा है, क्या दादू - दादी को वहां  भी अलग -अलग रखा जाएगा या वहां दोनों एक साथ रह सकते हैं ,साहिल की  आंखों में बहुत से सवाल नज़र आए गौरव को, लेकिन वो उसके  दिल की दूविधा को  मिटाने में असमर्थ था।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

Sunday, November 29, 2020

जब प्यार किसी से होता है-प्रेम बजाज

जब प्यार किसी से होता है


जब प्यार किसी से होता है , इक अजीब सा ख़ुमार होता है ।
मस्ती का आलम रहता है हर पल , दिल बेकरार होता है ।

होता है यार नकाब में फिर भी शौक़े - दीद रहती है हर पल
नज़रों से नज़रें मिलती हैं , आंखों में अश्क बेशुमार होता है ।

हर पल बेकरार रहती है ज़ुबां , करने को राज़ - ए- इश्क ब्यां
मगर इश्क वो बला है ज़ालिम कि ज़ुबां से ना इकरार होता है ।

सीने में होती है सरसराहट , हर पल महसूस होती है उनकी
आहट , झूमता है दिल नशे में ,जब इश्क बेशुमार होता है ।

सताती है *प्रेम * को हर पल यार की याद, तड़पती है रातों में
ना सुकुन मिलता है रातों में , ना दिन में ना करार होता है ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Thursday, November 26, 2020

फेसबुकिया प्यार ख़तरनाक-प्रेम बजाज



आक्षी को फेसबुक पे रोहित नाम के लड़के से प्यार हो गया ।
रोहित ग़ैर जात था, दोनों के माता-पिता नहीं मानेंगे, इसलिए रोहित के कहने पर आक्षी घर से भाग कर रोहित के पास पहुंच गई।
रोहित ने धोखा दिया, उससे शादी ना करके उसे कोठे पर बेच दिया। आक्षी ने कोठेवाली से मिन्नतें की कि उसे छोड़ दें , उसे इस दलदल में ना धकेले, लेकिन कोठेवाली ने उसकी एक ना सुनी, और उसे एक कमरे में बंद कर दिया, आक्षी खिड़की से भाग गई और ट्रेन की पटरी पर लेट गई।
संजय वहां से निकला, उसे पटरी पर लेटा देखकर, "आप आत्महत्या क्यूं कर रही है ??
आक्षी सारी बात बताती है और कहती है, अब किस मुंह से घर जाउंगी ?
संजय उसे समझाता है कि उसे इस तरह के प्यार पर विश्वास नहीं करना चाहिए था, जो इन्सान चन्द दिन पहले मिला, उसके लिए मां- बाप को छोड़ देना बेवकूफी है ।
ऐसे फेसबुकिया प्यार कभी सच्चे नहीं होते, इन पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं करना चाहिए ।
संजय आक्षी को घर छोड़ने जाता है, आक्षी के माता-पिता, बेटी को गले लगाते है, और संजय का शुक्रिया करते हैं "" थैंक्यू बेटा तुमने हमारी इज़्ज़त बचा ली। हमारी बेटी की जान बचाकर हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है । और इस तरह उसे ढेर सारी दुआएं देते हैं" ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

ये है प्यार की इंतेहा-प्रेम बजाज




दिल्ली शहर में राहुल एक अच्छे धनी परिवार से संबंध रखता था , शीना साधारण परिवार से थी लेकिन खूबसूरती देखते बनती थी , भरा-पूरा बदन , गोरा - चिट्टा रंग , तीखे नैन-नक्श , जो देखे तो पलक झपकना भूल जाए ।
राहुल भी ऊंचे कद-काठी का चौड़ा सीना , गेहुंआ रंग , जचता था , उस पर पैसे का घमण्ड तो तू भी नही गया ।
दोनों में अच्छी दोस्ती थी , ना जाने कब ये दोस्ती प्यार में बदल गई ।

# बढ़ जाए त्रिश्नगी जब हद से तो जां पर बन आती है
छलकते है लबों के जाम तो प्यास और बढ़ जाती है #
इसी तरह जोश-ए-जवानी ने वो काम किया , एक तुफ़ान आया और सबकुछ बहा कर ले गया ।
राहुल बहुत ग़लत हुआ , शादी से पहले ये ठीक नहीं ।
शीना मैं जानता हूं हमसे गलती हो गई , लेकिन हमारा प्यार सच्चा है , हमें किस बात का डर ।
मैं आज ही अपने मम्मी-पापा को तुम्हारे घर भेजता हूं हमारी शादी की बात करने के लिए ।
लेकिन एक सप्ताह बाद तो तुम अमेरिका जा रहे हो ।
तुम टेंशन मत लो जाने से पहले हमारी शादी हो जाएगी , हम बिल्कुल सिंपल सी शादी करेंगे और जब मैं वापिस आ जाऊंगा फिर हम एक फंक्शन कर लेंगे ‌।
राहुल के मम्मी-पापा शीना के घर जाकर बात करते हैं ,जब शादी की तारीख निकलवाने के लिए पंडित के पास गए तो पंडित ने बताया कि 6 महीने तक शादी का मुहूर्त नहीं । दोनों मन मार कर रह जाते हैं ।
राहुल एक सप्ताह बाद अमेरिका चला गया अपनी काम के सिलसिले में , इधर शीना भी अपनी नौकरी में व्यस्त है । दो महीने बाद शीना को पता चलता है कि वे मां बनने वाली है । राहुल के मम्मी-पापा को बताया जाता है तो वो मानने से इंकार कर देते हैं कि राहुल ही इस बच्चे का पिता है , और वो रिश्ते से भी इन्कार कर देते हैं ।
शीना अपने प्यार को मारना नहीं चाहती इसलिए वो दिल्ली छोड़कर मुम्बई चली जाती है और एक प्यारी सी गुड़िया को जन्म देती है ‌।
उधर राहुल को उसके मम्मी-पापा बताते हैं कि शीना इंतजार नहीं कर सकी और शादी कर ली ‌।
शीना की ज़िंदगी ख़राब ना हो इसलिए राहुल उससे कभी बात नहीं करता । शीना भी राहुल की शादी की बात सच मान कर राहुल को फोन नहीं करती । लेकिन दोनों को विश्वास है कि एक दिन वो ज़रूर मिलेंगे और जानना चाहेंगे कि क्यों किया ऐसा ।
शीना बेटी का नाम राशी , अर्थात दोनों का नाम जोड़ कर ( राहुल +शीना ) रखती है , वह अपनी बेटी में राहुल की झलक देख कर जी रही है कि अचानक शीना बीमार हो जाती है , पता चलता है कि शीना को ब्लड कैंसर है , दस साल की बेटी , कोई रास्ता नहीं तो दिल्ली वापिस मां- पापा के पास आ जाती है ‌।
राहुल इंडिया वापिस नहीं आना चाहता था , लेकिन उसके पापा बहुत बीमार हो गए ,और वो मिलने आ रहा है और रास्ते में क्या देखता है कि शाम का समय एक 15 साल की खूबसूरत लड़की जिसे दो लड़कों ने घेरा है और वो डंक कर उनका मुकाबला कर रही है ।
राहुल ये देख कर प्रभावित होता है ।
बहुत बढ़िया बेटा , ऐसे लोगों कि यही हश्र होना चाहिए , हम तो आप की बहादुरी के कायल हो गए बेटा , क्या हम आप के मम्मी-पापा से मिल सकते हैं , आप को घर भी छोड़ देंगे ।
राहुल राशी को घर छोड़ने जाता है तो शीना को देख अवाक रह जाता है ‌, और वहीं पर ही शीना के माता-पिता से पता चलता है कि राशी राहुल की ही बेटी है और शीना के कैंसर का भी पता चलता है ।
शीना मैं तुम्हारा गुनाहगार हूं , मुझे लगा सचमुच तुमने शादी कर ली , और तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई बवाल ना हो , इसलिए ना तो तुम्हारे फोन का जवाब दिया , और ना ही मैंने फोन किया । लेकिन अब नहीं , चलो अपने घर ।
राहुल शीना की मांग भरता है और घर ले आता है । और माता- पिता को समझाता है कि शीना और राशी ही उसकी ज़िंदगी हैं । राहुल के माता-पिता समझ जाते हैं और उन्हें भी अपनी गलती का एहसास होता है । राहुल के पापा अब ठीक हो गए हैं , और सब मिलजुल कर अच्छे से रह रहे हैं की अचानक शीना की तबीयत बिगड़ जाती है , और डाक्टर बता देते हैं कि शीना का आखिरी समय आ गया है , लगभग एक सप्ताह के पश्चात शीना राहुल की गोद में अंतिम सांसें लेते हुए विदा हो जाती है , लेकिन उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कुराहट होती है । कि उसने राहुल की अमानत उसे सोंप दी , और साथ ही साथ उसके इंतजार का भी अंत हुआ , आज वो अपने प्यार की बाहों में आखिरी सांस ले रही है । यही होती है प्यार की इंतहा ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Sunday, November 22, 2020

रिश्तों की अहमियत-प्रेम बजाज




मात-पिता के रिश्ते की जो ना जाने कद्र वो कुलांगार है ,
सच्चा रिश्ता वो होता है जो रिश्तों की माला करता कण्ठागार है ,
रिश्तों को रखें उलझाए हर पल जो वो रिश्तों का कसूरवार है ,
कभी हद से बढ़ जाती उलझन रिश्तों में तो लगता कारागार है।

रिश्तों को निभाना होता है दिल से यहां ना कोई रिश्तों का कामगार है ,
जब कूट- कूट भरा होता है प्यार- विश्वास वहां दिल बनता रिश्तों का ओगार है ,
ना उलझनें देना कभी रिश्तों को , ये रिश्ते खुशी के तलबगार है,
जो सींचे प्यार के पानी से रिश्ते के पौधे वो ही करूणागार है ।

जो ना समझो पाया अहमियत रिश्तों की उसका जीवन कगार है,
वो रहता ताउम्र जिंदगी से शर्मसार है,
इन प्यारे-प्यारे रिश्तों से मुंह मोड़ना तो बेकार है,
परवरदिगार ने बक्शे हैं ये प्यारे रिश्ते इन्हें निभाने वाले हम तो बस किरदार हैं।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Saturday, November 21, 2020

संडे स्पेशल कहानी-चिन्ता



           
एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।

राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।

विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई। कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियां यहां क्यों रखी हैं? संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो सिर्फ भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।

सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं। अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जाएगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।

ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है। उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जबकि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। सिर्फ कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता, संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।

अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं। उसको (भगवान) हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं।

कभी आप बहुत परेशान हों, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो तो आप आँखें बंद करके विश्वास के साथ उस परमात्मा को पुकारें जिसने आपको यह सुन्दर मनुष्य जीवन दिया है, सच मानिये थोड़ी देर में आपकी समस्या का समाधान मिल जायेगा।


Thursday, November 19, 2020

सुहाग ज़िन्दा रहे , वहीं असली मंगलसूत्र-प्रेम बजाज

धन-लक्ष्मी



रीटा के ससुर को अचानक रात को छाती में दर्द हुआ , डाक्टर के पास जाने पर पता चला कि सिरियस हार्ट अटैक है , और सर्जरी होगी वो भी दिल्ली जाना होगा , जिस के लिए लगभग तीन लाख रूपए का खर्च होगा ।
रीटा के पति अकेले बेटे हैं किसी और का सहारा भी नहीं और उन दिनों लेबर की स्ट्राइक के चलते काम पे भी काफी बुरा असर पड़ रहा था ।
सर्जरी भी जरूरी , उनकी जान को ख़तरा था , लेकिन इतने पैसे कहां से आए , रीटा के पति राहुल ने डाक्टर को तो सर्जरी के लिए कह दिया लेकिन बहुत परेशान थे ।
बोले किसी दोस्त से करता हूं बात अगर कोई उधार दे दे तो , रीटा की सास बोली मेरा मंगलसूत्र सैट के अलावा कोई गहना नहीं मेरे पास , वहीं ले जाकर बेच दो , सुहाग ज़िन्दा रहे , वहीं असली मंगलसूत्र है।
रीटा ने उसी समय अपने पति के हाथ पर एक एफ. डी. दो लाख की और अपनी पासबुक जिसमें लगभग सत्तर- अस्सी हजार रुपए थे , पकड़ा दी।
रीटा का पति और सास उसे बड़ी हैरानी से देख रहे थे कि इतने पैसे वो कहां से लाई ?
वो बस इतना कह पाई कि "" ये मेरी बचत है ।
मम्मी जी ने उस समय उसे गले से लगा लिया, और बोली बेटी मुझे क्षमा करना , तुम हर महीने जब भी पहली तारीख को बजट बनाने लगती थी तो हर बार मैं तुम्हें यही बोलती थी कि ना जाने ये क्या बही- खाते लेकर बैठ जाती है ,इससे क्या होगा , जो है खर्च करो हिसाब- किताब क्या लिखना ।
और तुम हर बार यही कहती ... मम्मी जी बजट बनाकर चलना चाहिए ,और आने वाले बुरे या अच्छे समय के लिए कुछ ना कुछ सेविंग अवश्य होनी चाहिए , तुम सही कहती थी।
तुम तो सचमुच मेरी आज धन- लक्ष्मी बन गई।
आज से मैं तुम्हें धन- लक्ष्मी ही कहूंगी।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Friday, November 13, 2020

एक समीक्षा मेरे उलझे हुए मन से प्रस्फुटित हुई-भावना ठाकर

एक समीक्षा मेरे उलझे हुए मन से प्रस्फुटित हुई



क्यूँ लोगों को एक बार में लेखक की मौलिक छवि समझ में नहीं आती, कुछ महानुभावों को पहले ज़िल्लत ओर बाद में नवाजिश मिली ऐसे बहुत से लेखक है उनमें से एक उर्दू के बेहतरीन ओर बेबाक लेखक हसन मन्टो के ख़िलाफ़ बोल्ड लेख लिखने के विरुद्ध में केस हुआ,उनका लिखा बाद में 17 भाषाओं में अनुवादित हुआ और बेस्ट सेलर साबित हुआ। कितनी बायोपिक और शोर्ट फिल्म बनी। वैसे समाज खुद को बोल्ड ओर खुले विचारों वाला दिखाने में माहिर तो है, बोल्ड बातें ओर कहानियां चटकारे लेकर पढ़ते है पर लेखक के उपर ऊँगली उठाने में बिलकुल देर नहीं करते।
गुजराती लेखक चंद्रकांत बक्षी पर भी उनकी कहानी "कुत्ती" के विरुध्ध में केस हुआ था, टैगोर जी को भी उस ज़माने में "चोखेर बाली" लिखने पर आधुनिक बोलकर चर्चा की तलवार पर लटकाया गया।
अश्लीलता क्या होती है? कलात्मक शब्दों को सजाकर लिखी गई रचना को नंगी सोच के साथ पढ़ने वाले शृंगार रस को कभी नहीं समझ पाएँगे। एक स्त्री के शरीर को एक ही निगाहों से तोलने वालों की नज़रों में शृंगार रस अश्लील है, और उस पर भी अगर स्त्री शृंगार रस लिखती है तो खाँखें चौंधिया जाती है। उपर वाले ने स्त्री के उसी हिस्से को मातृत्व से नवाज़ा है, एक जीव का सर्जन वहीं से होता है जिसे कुछ लोग सिर्फ़ वासना सभर द्रष्टि से देखते है।
उरोज को बच्चे के पोषण का हिस्सा बनाया अगर ये हिस्से अश्लील है तो ईश्वर गुनहगार है। गीत गोविंद हो, कालिदास के नाटक हो, या वाल्मीकि कृत रामायण हमारे साहित्य की धरोहर में कहीं ना कहीं शृंगार रस की सुंदर सी छवि झलकती है। राधा का रुप, सीता की सौम्यता और द्रौपदी की कमनियता का वर्णन बखूबी किया है। इस युग से तो वो युग ज़्यादा आधुनिक था कृष्ण-द्रौपदी राधा-कृष्ण उनके रिश्ते पर किसीने ऊँगली नहीं उठाई थी उस रिश्ते को हम आज भी पूजते है।
कब तक साहित्य को समझे बिना कुछ लोग अपनी संकुचित मानसिकता के चलते लोगों को भड़काते रहेंगे। क्यूँ आज 21 वी सदी में भी एक स्त्री और पुरुष के रिश्ते को शक भरी निगाहों से ही देखा जाता है, क्यूँ इस विषय में हम बच्चों से खुलकर बात नहीं कर सकते।
यहाँ मुझे वर्ल्ड बेस्ट लेखिका अम्रिता प्रीतम जी की याद आ रही है। पहले उनके विचारों को बोल्ड दर्शाते केस हुए, आक्षेप हुए और बाद में ज्ञानपीठ अवॉर्ड ओर पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ओर आज उनकी एक-एक रचनाएँ लोगों को प्रेरित करती है।
स्त्री के हर पहलू को गंदी सोच, गंदी नज़र से देखने वालों को ओर शृंगार को वासना का रुप देने वालों को क्या कहेंगे ? एसे विवेचकों की सोच के पीछे कौन से संस्कार काम करते है, क्या एसी सोच वालों को उनकी माँ, बहन, बीवीयाँ टोकती नहीं होंगी, या फिर टोकने पर एसे लोग अपने घर की औरतों को चुप करा देते है।
जो स्त्री मर्दों की प्रतिक्रिया से ना डरकर बेबाक और मुखर लिखती है उसके खिलाफ मोर्चा निकाल कर स्त्री के लिए उतरती भाषा प्रयोग करने वाले शायद असुरक्षा की भावना से पीड़ित हो। स्त्री की सफलता ओर प्रसिद्धि कहाँ हज़म होती है कुछ एक मर्द को।
जो भी हो पर एक स्त्री लेखिका आज भी शृंगार रस या किसी बोल्ड विषय पर लिखने से पहले एक बार सोचती जरूर है की मेरा लिखा पढ़ने पर मेरे घर के मर्दों के प्रतिभाव कैसे होंगे या मेरा पति इस बारें में क्या सोचेगा, हर शब्द को तोल मोल कर लिखती है।
कृष्ण प्रेम में पागल मीराबाई को सबने पहले गालियाँ दी ज़हर तक पिलाया आज उसी मीरा के कृष्ण प्रेम में लिखे गए पद को श्रद्धा से नमन करते है।
पर खैर कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना। लेखकों को अपनी कल्पनाओं को परवाज़ देकर अपने लेखन में हर विषय पर प्रयोग करते लिखना चाहिए। एसी कोन्ट्रोवर्सी से प्रसिद्धि ही मिलती है लोग ढूँढ ढूँढ कर आपकी वो रचनाएँ पढ़ेंगे ओर आपकी आधुनिक विचारों को दस में से पाँच लोग भी अपनाते है तो आपका लिखा सार्थक है।
सबको चटपटा पढ़ना पसंद है पर उससे ज़्यादा पढ़ कर आलोचना करने में ज़्यादा रस होता है, दो मुँह वाली दोरंगी दुनिया को सलाम।।
(भावना ठाकर,बेंगुलूरु)#भावु

भाई दूज का तोहफ़ा तो लेकर रहना-भावना ठाकर



माँ इस बार मैं आपकी नहीं सुनूँगा दीदी की शादी कोहकर रोक देती हो की बेटियों के घर बार-बार नहीं जाना चाहिए कह कर रोहित संजना के घर जाने की तैयारी करने लगा। इस बार कल्याणी ने भी नहीं रोका बोली ठीक है हो आओ बहुत दिनों से संजू भी नहीं आई उसे भी अच्छा लगेगा।
जी माँ दी का घर दूर कहाँ महज़ दो घंटे का रास्ता तो है सुबह जाऊँगा रात को लौट आऊँगा। कल्याणी ने बेटी और दामाद के लिए कुछ तोहफ़े और मिठाईयाँ दी वो लेकर रोहित निकल गया। अचानक जाकर खुशी-खुशी बहन को सरप्राइज़ देना चाहता था तो बिना कोई खबर दिए ही चल निकला।
रास्ते में रोहित को संजना के साथ बिताए बचपन के एक-एक पल याद आ रहे थे। सिर्फ़ दो साल ही बड़ी थी दीदी पर माँ जितना खयाल रखती थी। मेरी हर छोटी मोटी जरूरत का ख़याल दी ने रखा, परिक्षा के दिनों में जब रात भर मैं पढाई करता था तो दी उठ-उठ कर चाय बना देती थी नास्ता बना देती थी।
मेरी गलती खुद के सर लेकर माँ से डांट भी खाती थी। उसके ससुराल चले जाने के बाद तो मानों मेरा जीवन नीरस और शांत हो गया है बहुत प्यारी है मेरी दी भगवान उसे हंमेशा खुश रखना। यूँ खयालों में दो घंटे कहाँ बीत गए पता नहीं चला। रोहित ने बस से उतरकर ऑटो ले ली संजना का घर ज़्यादा दूर नहीं था। ऑटो वाले को पैसे देकर रोहित संजना के घर पहूँचा जो खुद सरप्राइज़ देने वाला था वो खुद सरप्राइज़ हो गया। घर की दहलीज़ पर कदम रखते ही कदमों में रोती हुई संजना को पाया। संजना के पति ने संजना के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ रशीद कर दी ये कहते हुए की दो साल से तुझे बोल रहा हूँ तेरी माँ को बोल मुझे बाइक के लिए 50 हज़ार रुपये दे पर तू है की तुझे मेरी कोई परवाह ही नहीं। तेरी माँ क्या उपर सब साथ में लेकर जाएगी, एक ही तो दामाद हूँ माँ बेटी से इतना भी नहीं होता मेरे लिए।
रोहित अपनी दीदी को इस हालत में देखकर हैरान रह गया। विशाल का ये रुप भी था उसे विश्वास नहीं हुआ। विशाल ने ना रोहित का आदर सत्कार किया ना एक नज़र देखा भी बस गुस्से में तिलमिलाता घर से बाहर निकल गया। रोहित का मन आहत हो उठा संजना इतना कुछ भुगत रही थी उसने आज तक कभी भनक तक नहीं पड़ने दी। रोहित भीतर से हिल गया। रोहित ने संजना को प्यार से उठाया और चलो दीदी घर चलो कहकर आँसू पौंछे।
संजना रोहित से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी ओर बोली भाई तू चला जा मेरी किस्मत में यही सब लिखा है, विशाल का स्वभाव बहुत खराब है आए दिन हाथ उठाना ओर ताने देना उसकी आदत बन गई है।
पर एक भाई अपनी बहन को इस हालत में कैसे देख सकता। प्यार से बहन को उठाकर गले लगाया और आँसू पौंछते बोला दीदी अभी तुम्हारा भाई ज़िंदा है अभी के अभी अपना सामान पैक करो और चलो मेरे साथ इस नर्क में तड़पते जीने की कोई जरूरत नहीं।
संजना ने बहुत समझाया पर रोहित ने अपनी कसम देकर अपनी बहन को मना लिया। दोनों भाई बहन घर आ गए और अपनी माँ को सारी बात बताई। एक विधवा माँ के उपर आसमान टूट पड़ा बेटी को इस हालत में देखकर कुछ सूझ नहीं रहा क्या करें तो माँ ने कहा मेरी सोने की दो चूड़ी पड़ी है बेचकर दामाद जी को दे दो ताकि संजना का संसार बना रहे। पर रोहित ने साफ़ मना कर दिया और बोला माँ आज अगर उनकी मांग के सामने झुक गए तो कल को कुछ और मांगेंगे, कब तक हम सब बेच बेचकर उनका घर भरते रहेंगे। अगर उनको ये रिश्ता बचाना है तो दीदी को सम्मान से रखना होगा हमारी हैसियत को समझते नाजायज़ मांग को वापस लेना होगा, या तो फिर तलाक देकर इस रिश्ते को खत्म करना होगा। मैं ना दहेज़ देने के हक में हूँ ना लेने के मैं अभी पहले पुलिस स्टेशन जाकर दीदी को प्रताड़ित करने के लिए और दहेज की मांग करने के जुर्म में जीजू के ख़िलाफ़ फ़रियाद लिखवाने जा रहा हूँ, और महेश चाचा का बेटा विकास जो वकील है उससे मिलकर आगे क्या करना है उसके लिए मशवरा करने जा रहा हूँ।
संजना और माँ ने बहुत समझाया कि ऐसा करने से रिश्ता बिगड़ सकता है पर रोहित आज के विचारों वाला युवा था तो अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने से खुद को कैसे रोकता। सारी कारवाही हो गई वकील की नोटिस और पुलिस का समन्स मिलते ही दामाद जी कि सारी अकड़ निकल गई। दूसरे ही दिन बीवी संजना को घर ले जाने दौड़े-दौड़े चले आए और गलती की माफ़ी मांगते शर्मिंदा होते इतना ही बोले, मेरी मति मारी गई थी जो संजना जैसी गृहलक्ष्मी को प्रताड़ित करके नगद नारायण के मोह में अपना ही संसार उजाड़ने चला था।
मैं ये क्यूँ भूल गया था कि उपर वाले ने मुझे दो हाथ दिए है दो पैर दिए है तो अपने बलबुते पर जो चाहे कमा कर शौक़ पूरे करूँगा, क्या हक है मुझे संजना को प्रताड़ित करके आप लोगों से पैसे एंठने का। अपने जिगर का टुकड़ा आपने मेरी झोली में ड़ाल दिया है जो अब मेरे घर की गृहलक्ष्मी है उसे दु:खी करूँगा तो उपर वाला मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा।
चलो संजना घर मुझे कुछ नहीं चाहिए तुम हो तो सबकुछ है। और रोहित को भी भाई कि तरह गले लगाकर माफ़ी मांगते विशाल इतना ही बोला तू छोटा होकर भी कितना समझदार है, मैं वचन देता हूँ आज से संजना को पूरे मान सम्मान के साथ रखूँगा। रोहित ने भी नम आँखों से अपने बहनोई के पैर छूकर कहा जीजू मैंने कोई फ़रियाद नहीं लिखवाई अपने वकील दोस्त के कहने पर सिर्फ़ फ़र्ज़ी नोटिस आपको भिजवाई थी हो सके तो आप भी मुझे माफ़ कर देना मैंने तो अपनी बहन का संसार बचाने के लिए जो ठीक समझा किया। संजना के चेहरे पर खुशियों के लाखों दीप जल उठे। आज एक भाई ने भाईदूज के दिन बहन का संसार बचाकर एक बेहतरीन तोहफ़ा दिया अपनी बहन को। एक विधवा माँ ने अपने तीनों बच्चों को बाँहों में भरकर खूब आशिर्वाद दिए।
(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Thursday, November 12, 2020

दीपोत्सव की खुशी-प्रेम बजाज



पांच दिन का पर्व हिन्दू संस्कृति में बहुत ही अहम माना जाता। वैसे तो कार्तिक मास में पूरा मास दिए जलते हैं, लेकिन ये  पांच दिन विशेष पर्व मनाया जाता है।

दीपोत्सव का अर्थ दीपों कि त्योहार, दीप माला , दीपों से सजा संसार , ये भुतल ।
दीपावली अर्थात दीप की आवली अर्थात पंक्ति,हर जगह दीपों की पंक्तियां अमावस्या की काली रात में भी उजियारा कर देती है ।
पांच दिन का ये पर्व,
पहले दिन धनतेरस जिसमें धन के देवता कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।
दूसरे दिन नर्क- चतुर्दशी जिसे रूप चौदस भी कहा जाता है, इस दिन सुर्य भगवान की पूजा होती है, इस दिन सुर्य उदय से पूर्व स्नान करने की परंपरा है।



तीसरे दिन  दिवाली के रूप में मनाई जाती है, मां लक्ष्मी , गणेश, सरस्वती और कुबेर की पूजा की जाती है,पूरे घर को रंगोली, दीपों इत्यादि से सजाया जाता है,इस दिन अच्छाई की बुराई पर जीत हुई , भगवान राम चौदह वर्ष का बनवास काट कर अयोध्या माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ लौटे थे, पूरी अयोध्या में  दीपोत्सव मनाया गया ।
और चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भैया - दूज जिसे यम द्वितिय भी कहते हैं, ये भाई- बहन के पवित्र रिश्ते का पावन त्योहार है।
दीपोत्सव कि अर्थ केवल इतना नहीं कि भौतिक रूप से ही दीप जलाएं बल्कि मानसिक रूप से भी दीपोत्सव मनाना चाहिए ‌।
यदि से काम, क्रोध , लोभ, मोह का अंधकार मिटाएं, अन्दर  की लौ भी रौशन करे,( मन चंगा तो कठौती में गंगा ) मन में किसी के प्रति भेदभाव , इर्ष्या भाव ना रहे ।
प्रत्येक जीव के लिए प्रेम भाव हो, बड़ों के लिए सेवाभाव हो। 
त्योहारों के दीपोत्सव के साथ-साथ मन का दीपोत्सव भी मनाएं, तभी जीवन सार्थक है ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Wednesday, November 11, 2020

धनतेरस के शुभअवसर पर ढेरों बधाईयां




*आपको और आपके परिवार को धनतेरस के शुभ अवसर पर ढेरों बधाईयां आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा धन यश कीर्ति सदा कायम के साथ बनी रहे इसी मंगल कामना के साथ बहुत बहुत बधाई देता हूँ🙏🙏*


*डायरेक्टर*
*अनुराग सिंह (पत्रकार)*
*इंद्रा कंप्यूटर एजुकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी*
*सहायल/जिला-औरैया*

आओ मिलकर दीप जलाएं-प्रेम बजाज




दिये की लौ से तिमिर भगाएं, फिर से वही विश्वास जगाएं
अनेकता में एकता लाएं जीत कर चुनोतियों को दिखाएं ।
ताली -थाली बजा कर जैसे एकता दिखाई थी वैसे फिर एकता दिखाएं
बस एक - एक दीप जलाना है एक से एक मिलाना है , एक से
एक मिल कर के दिवाली सा प्रकाश होगा ,जब हम सब का साथ होगा ।

होकर के एक जुट इस कठिन समय में भी खुशियां लाएं,
ना गले ना हाथ मिला कर दूर रह कर अपने घर में दीप जलाएं ।
एकता और सद्भाव जगाएं सब मिल कर आपदा का तिमिर हटाएं
खुशहाल देश का सपना सजाएं, हर चेहरे पर मुस्कान लाएं ।

देश के सुन्दर उपवन को नेक इरादों के फूलों से सजाएं
करके जाप महामृत्युंजय का महाकाल से भरपूर शक्ति पाएं ।
आओ मिलकर दीप जलाएं , खुशियों भरी दिवाली मनाएं ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज , जगाधरी ( यमुनानगर )

अंतिम बार कब मनाई थी गांव में दिवाली- वीरेन्द्र बहादुर सिंह



दशहरा होते ही दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है। पहले घर की साफ-सफाई, उसके बाद खरीदारी। कार्तिक कृष्णपक्ष की एकादशी से ही दिवाली का त्योहार मनाया जाने लगता है। धनतेरस से दिवाली की पूजा होने लगती है। धनतेरस, कालीचतुर्दशी और फिर दिवाली। उसके बाद प्रथमा यानी परेवा से गुजरात-महराष्ट्र में नया साल मनाते हैं और उसके अगले दिन भैयादूज। उस दिन बहन के हाथ पवित्र कर के नए साल की शुरुआत करते हैं। हमारे त्योहारों में सामाजिक संबेध इस तरह गुंथे हुए हैं कि साल के दौरान अगर संबंधों में थोड़ी ऊंच-नीच हो गई हो तो ये त्योहार हमें फिर एक बार मिला देते हैं। जीवन मेें आप दुख तो अकेले सहन कर कर सकते हैं, परंतु अगर प्रकृति आप पर मेहरबान है और खुशी आप का दरवाजा खटखटा रही है तो खुशी मनााने के लिए आपको स्वजन चाहिए, मित्र चाहिए। क्योंकि खुशी कभी अकेले नहीं मनाई जा सकती। अगर अकेला आदमी हंसता दिखई दे जाए तो लेग उसे पागल कहते हैं। हंसी तो स्वजनों और मित्रें के साथ शेयर करने की चीज है। मित्रें-स्वजनों के बिना हंसना संभव ही नहीं है।
हमारा कोई भी त्योहार और उत्सव हो, हमेशा मिलजुल कर यानी सामूहिक रूप से मनाए जाते हैं। होली और दिवाली तो त्योहारों के राजा माने जाते हैं। होली-दिवाली परं हम अपने स्वजनों और मित्रें को याद किए बिना रह ही नहीं सकते। होली-दिवाली हकीकत में अपनों के साथ मिलकर मनाने के त्योहार हैं। उसमें दिवाली की अनग ही बात है। दिवाली के साथ हमारी हर पल, हर दिन की यादें जुड़ी होती हैं और इन यादों में हमारे मित्र और स्वजन शामिल होते हैं। इसलिए जब भी दिवाली आली आती है, तब हमें अपने गांव की याद जरूर आती है। गांव की दिवाली की याद किए बिना हम रह ही नहीं सकते। दिवाली को ही लेकर गांव के बारे में एक बात प्रचलित है कि कमाने के लिए आप देश-विदेश कहीं भी गए हों, पर जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आने लगती है, वैसे-वैसे जैसे गांव बुला रहा हो, इस तरह अंदर से अजीब तरह का खिंचाव सा महसूस होने लगता है। लगता है जैसे गांव हमें पुकार रहा है कि दिवाली आ गई है, चले आओ। बहुत कमा लिया है, कुछ दिन स्वजनों के साथ भी बिता लो। गांव की गलियां याद कर रही हैं।
शहरीकरण के इस जमाने में गांव लगभग खत्म से होते जा रहे हैं और शहर बसते जा रहे हैं। परंतु इन शहरों में रहने वालोें की पहली पीढ़ी किसी न किसी गांव से ही आई है। गांव से आने वाले लोग दिवाली आते ही बेचैन हो उठते हैं। किसी न किसी तरह ये लोग गांव जाने के लिए छटपटाने लगते हैं। छोटी सी कार में ठसोठस सामान भर कर 200-400 किलोमीटर का सफर करके ये लोग दिवाली मनाने गांव पहुंच जाते हैं। कार नहीं है तो रेलगाड़ी या फिर बस से जाने की कोशिश करते हैं। रिजर्वेशन नहीं है तो खड़े-खड़े ही चले जाते हैं। ट्रक, टेम्पों या जो भी मिल जाए, उस साधन से दिवाली के पहले गांव पहुंचने की उतावल होती है।
आज की पीढ़ी की यह बिलकुल समझ में नहीं आता कि पापा गांव में दिवाली मनाने के लिए इतना अधीर क्यों रहते हैं? जिस गांव में सुबह से ही धूल उड़ने लगती है, वहां न कोई रेस्टोरेंट है न होटल, फिल्म देखने के लिए कोई थिएटर नहीं है, शॉपिंग के लिए एसी मॉल भी नहीं है, ऐसे में वहां दिवाली का क्या मजा? जहां इलेक्ट्रिक पावर का भी ठिकाना नहीं है, नहाने के लिए पानी भी ढ़ंग से नहीं मिलता, वहां दिवाली कैसे मनाई जा सकती है। ये बातें आज की पीढ़ी के गले नहीं उतरतीं। पर इस पीढ़ी ने हमेशा अपने पिता या दादा से गांव में दिवाली मनाने की बातें जरूर सुनी हैं, जिससे उन्हें यह तो पता चल गया है कि गांव में मनाई जाने वाली दिवाली के सामने शहर में मनाई जाने वाली दिवाली एकदम फीकी होती है।
आखिर क्या होता है गांव की दिवाली में? दिवाली में साफ-सफाई तो रूटीन की बात है। पर जब उसके बाद जब दिवाली के लिए मिठाई और नमकीन बनाने की बात आती है तो उसमें पूरा घर-परिवार जुट जाता है। आज बाजार में ब्रांडेड मठिया और पापड़ उपलब्ध हैं। पर गांवों में घर में बनने वाली मठिया और पापड़ की सुगंध आज भी पुरानी पीढ़ी को तरबतर करती है। शहर के ब्रांडेड पापड़ और मठिया उनके सामने एकदम फीके लगते हैं। घरोें में आटा तैयार करके बनाई गई मठिया और पापड़ खाने में जो मजा आता था, वह आज की पीढ़ी को कहां से नसीब होगा। गुझिया पर कंगूरी डालने की कला को अब लोग भूलते जा रहे हैं। परं मुंह में रखते ही गल जाने वाली वह गुझिया और हर कौर में आने वाली इलायची की सुगंध और स्वाद आज 1200 रुपए किलोग्राम मिलने मिठाई में भी नहीं आता।
दिवाली के पहले घर के बच्चों के लिए सबसे पहला काम होता थादघर के बाहर रंगोली बनाने की तैयारी। आज की तरह या यह कह लो कि पहले रंगोली बनाने के लिए रंग तो मिलते नहीं थे, इसलिए रंगोली बनाने के लिए रंग मिट्टी रंग करतैार किए जाते थे। इसलिए अच्छी मिट्टी देख कर ले आना और फिर उसे रंग कर तैयार करना। एकादशी की रात जागरण करके, साथ में नाश्ता में वही मठिया और पापड़ की दावत उड़ाते हुए रंगोली बनाना। चचेरे भाई-बहनों के साथ रात में जाग कर बनाई जाने वाली रंगोली और फिर रात में ही किस घर की रंगोली अच्छी बनी है यह देखने के लिए घर-घर जाना, एक काबिल जज की तरह हर रंगोली में कुछ न कुछ खराबी निकाल कर अपनी ही रंगोली को अच्छी साबित करने का मजा ही कुछ अलग था। बाघद्वादस के दिन निश्चित रंगोली में बाघ का स्थान तमाम घरों के बाहर देखने को मिलता। धनतेरस को हर घर में धन की पूजा होती। इस पूजा में अंग्रेजों के जमाने का चांदी का विक्टोरिया सिक्का साल में एक बार देखने को मिलता। जिस पर पंचामृत का अभिषेक होता। कालीचतुर्दशी को गांव के बाहर बने हनुमानजी के मंदिर पर तेल चढ़ाने जाना और वहां से पुजारी तेल की कटोरी में जो सिंदूर देता, उसे घर लाकर हर दरवाजे और खिड़की पर लगाना । बड़े-बूढ़े कहते थे कि वह सिंदूर लगाने से घर में चोर नहीं आते। कालीचतुर्दशी को गांव के सभी घरों में बड़ा-पूरी और पकौड़ी बनती। पूरे दिन पकौड़ी और बड़ा की दावत चलती रहती। इसके बाद दिवाली आती, जिसकी राह हम पूरे साल से देख्ते रहते थे। शाम को पूजा होती और उसके बाद पटाखे फोड़ने का कार्यक्रम शुरू होता, जो पूरी रात चलता रहता। अगले दिन यानी परेवा को सुबह पुरोहित की आवाज सुन कर सब जाग जाते और छोटे-छोटे बच्चे नमक लेकर शगुन कराने आते। इस तरह नए साल का शगुन नमक से होता। उसके बाद नए कपड़े पहन कर गांव के बड़े-बूढ़ों के घर जाकर उनके पैर छूने का कार्यक्रम चलता, जो दोपहर तक चलता रहता। दिवाली के इन तमाम दिनों में देवदर्शन के लिए तो रोज जाना होता।
दिवाली तो आज भी मनाई जाती है, पटाखे भी फोड़े जाते हैं और मिठाई भी खाई जाती है, पर गांव की दिवाली के सामने ये सब इतने फीके क्यों लगते हैं, समझ में नहीं आता। आज की दिवाली में हमारे पास सब कुछ है, अधिक पैसा है, अधिक मित्र हैं, परंतु पहले जैसा मजा क्यों नहीं आता, यह सवाल दिवाली की रात बिस्तर पर लेटे-लेटे निश्चित दिमाग में सालता है। इसका कारण शायद यह है कि पहले जैसा निःस्वार्थ प्रेम हम खो बैठे हैं। पहले जेब खाली होती थी, पर दिल प्रेमिल भावनाओं से भरा होता था। आज भावनाएं तो यथावत हैं, पर कुछ कमी जरूर है। यह कुछ कमी क्या है, अगर इसका जवाब पता चल जाए तो फिर हमारी दिवाली फिर पहले जैसी ही आनंद वाली हो सकती है। यह कुछ कमी क्या है, इसकी खोज हर किसी को अपनी तरह से करनी होगी।
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436, सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336

Tuesday, November 10, 2020

आखिर पैसों बर्बादी ही क्यों -प्रेम बजाज




माना त्योहारों पर  सभी को चाह होती है , कि हंसी-खुशी त्योहार मनाएं , नए कपड़े हो , घर सजा - धजा हो , होली पर रंग खेलें , दिवाली पर ढेर सारे पटाखे चलाएं  ।
लेकिन हमें अपनी जेब देख कर खर्च करना चाहिए ना कि इधर- उधर से उधार लेकर ।
अगर हम इश्वर की कृपा से समृद्ध है तो हम परिवार के लिए नए कपड़े , तोहफे ( जो किसी भी रूप में ) सोना - चांदी या बच्चों के लिए खिलौने ला सकते हैं , लेकिन केवल परंपरा के नाम पर  और उधार लेकर ऐसा करना मुर्खता है ।
बड़े बुजुर्गो ने भी कहा है , "" तेते पांव पसारिए जेती लम्बी सोर ""
पुरातन समय के  लोग साधारण जीवन जीते थे , त्योहार या विवाह  पर ही ने कपड़े या गहने इत्यादि खरीदे जाते थे , बहु- बेटियों को भी ने कपड़े या गहने तोहफ़े में दिए जाते थे ,इसका अर्थ कदापि ये नहीं कि त्योहारों पर नया कपड़ा पहनना एक परंपरा है।
आजकल तो लोग अक्सर ही कपड़े या गहने खरीद लाते हैं कभी सेल के नाम पर तो कभी कुछ नया चाहिए , जब अक्सर शापिंग होती ही रहती है तो त्योहार पर ने कपड़े कुछ परंपरा का तो केवल ढकोसला ही माना जाएगा , पैसे की बर्बादी माना जाएगा ।अगर हम ये पैसे की बर्बादी रोक कर यही किसी गरीब की मदद कर दे , किसी गरीब का तन ढक दें , किसी को पढ़ने के नाम पर कुछ दे , कुछ अपने बुरे वक्त के लिए सहेज कर रखे , तो आने वाली पीढ़ी को भी हम कुछ शिक्षा दे पाएंगे।
आजकल लगभग आठ महीने से सभी का काम मंदा है , ऐसे में खाना और कपड़ा ये हर इन्सान की ज़रूरत है , जिनके पास कुछ सहेजा हुआ था उन लोगों का तो ठीक से चल गया , लेकिन जिनके पास नहीं था , भूखों मरने की नौबत आ गई उन्हें कहीं ना कहीं से उधार लेकर चलाना पड़ रहा है , लेकिन सोचिए जब तक सब नार्मल होगा , उस आने वाले समय में वो कितना काम करेंगे कि तब भी खाना हो और पिछला भी चुकाएं , किसी को पता तो नहीं था कि कोरोना आएगा और ऐसी बेरोजगारी होगी , इसलिए आने वाले वक्त के लिए हमें हमा तैयार रहना चाहिए।
ये छोटी छोटी बचत ही हमारे आने वाले बुरे वक्त में बहुत बड़ा सहारा बनेगी ।
इसलिए परंपराओं के नाम पर नया कपड़ा या ढेर सारी पटाखे लेकर पैसे की बर्बादी और वातावरण को दुषित ना करें ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

Sunday, November 8, 2020

कंप्‍यूटर का इतिहास

INDRA COMPUTER EDUCATION OF TECHNOLOGY
ICET (GURU)

कंप्‍यूटर का इतिहास

History of Computer

एबैकस (Abacus)
आंकिक गणना (Arithmatic Calcualtion) करने के लिए सबसे पहले चीन में एबैकस (Abacus) नामक यंत्र का उपयोग किया गया। एबैकस को ही सबसे पहला गणना यंत्र माना जाता है।


पास्‍कलाईन (Pascaline)


पास्‍कलाईन (Pascaline) अथवा पास्‍कल कैलकुलेटर(Pascal Calculator) पहला मैकेनिकल गणना मशीन (Mechanical Calculator) थी जिसे फांसीसी गणितज्ञ ब्‍लेज पास्‍कल (Blaise Pascal) ने 1645 में बनाया था। इस कैलकुलेटर में इंटर लोकिंग गियर्स (Inter Locking Gears) का उपयोग किया गया था जो से 9 तक की संख्‍याओं को दर्शाता था। यह कैलकुलेटर सिर्फ जोड़ और घटाव करने के लिए उपयोग होता था इसलिए इसे ऐडिंग मशीन (Adding Machine) भी कहा जाता है।

एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine)

एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) सन 1820 में चार्ल्‍स बैबेज (Charles Babbage) ने सबसे पहले डिफरेंस इंजन का आविष्‍कार किया और बाद में एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) का आविष्‍कार किया। चार्ल्‍स बैबेज के कॉन्‍सेप्‍ट का उपयोग करके ही पहले कंप्‍यूटर प्रोटोटाईप का निर्माण किया गया इसलिए चार्ल्‍स बैबेज को 'कंप्‍यूटर का जन्‍मदाता' (Father of Computer) कहा जाता है।
जॉन वॉन न्‍यूमैन ने एडा लवलेस के बाईनरी कोड का उपयोग करके आधुनिक कंप्‍यूटर का विकास किया। इसलिए एडा लवलेस को 'बाईनरी प्रणाली का आविष्‍कारकऔर 'प्रथम प्रोग्रामरकहा जाता है।

पंच कार्ड (Punch Card)

हरमन हॉलोरथ ने पंचकार्ड मशीन का आविष्‍कार किया।

एनीएक (ENIAC)


विश्‍व का पहला इलेक्‍ट्रॉनिक कंप्‍यूटर 1946 में बनाया गया जिसका नाम था एनीएक। जिसका पूरा नाम हैElectronic Numerical Integrator And Computer

यूनिवेक (UNIVAC-I)


यूनिवेक को प्रथम पीढ़ी का कंप्‍यूटर भी कहते हैं इसका उपयोग व्‍यापारिक क्षेत्र में किया जाने लगा था। इसका पूरा नाम है Universal Automatic Computer

कम्प्यूटर के कुछ जनरल प्रश्नों के उत्तर दो-

Indra Computer Education of Technology



Q.11. निम्न में से किसका सम्बन्ध कम्प्यूटर के प्रोसेसर से नहीं है


(A) Dual Core


(B) i7


(C) Celeron


(D) Android



Q.12. भारत में कंप्यूटर का प्रथम बार प्रयोग कहाँ किया गया था


(A) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली


(B) प्रधान डाकघर, नई दिल्ली


(C) प्रधान डाकघर, बेंगलुरु


(D) भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता



Q.13. कंप्यूटर साक्षरता का अर्थ है-


(A) कंप्यूटर प्रोग्राम लिखना


(B) कंप्यूटर की त्रुटि सुधारना


(C) कंप्यूटर की कार्य क्षमता की जानकारी रखना


(D) कंप्यूटर की कार्य प्रणाली जानना



Q.14. कंप्यूटर प्रोसेस द्वारा इनफार्मेशन में परिवर्तित करता है


(A) इनपुट को


(B) नंबर को


(C) डाटा को


(D) प्रोसेसर को



Q.15. एनालिटिक इंजन का निर्माण किसने किया था


(A) जी. एकल


(B) एवा लवलेस


(C) चार्ल्स बैबेज


(D) सीमेन कोर्सकोब



Q.16. कंप्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान किसका है


(A) चार्ल्स बैबेज


(B) जोसेफ जैक्युर्ड


(C) ब्लेज पास्कल


(D) वॉन न्यूमान



Q.17. चुम्बकीय डिस्क पर किस पदार्थ की परत होती है


(A) आयरन ऑक्साइड


(B) सोडियम पेरोक्साइड


(C) मैग्नीशियम ऑक्साइड


(D) इनमें से कोई नहीं



Q.18. स्क्रीन पर प्रदर्शित पिक्सल की संख्या स्क्रीन ............. के नाम से जाने जाते हैं


(A) रेसोलुशन


(B) कलर डेप्थ


(C) रिफ्रेश रेट


(D) व्यूविंग साइज

Q.19. निम्न में कौन कोन एक programming language नहीं है


(A) Java


(B) FoxPro


(C) Perl


(D) Oracle



Q.20. निम्न में से कोनसा इंटरनेट एक्स्प्लोरर नहीं है


(A) क्रोम


(B) फायरफॉक्स


(C) सफारी


(D) गूगल प्लस



डायरेक्टर-अनुराग सिंह 

सहायल(औरैया)


Saturday, November 7, 2020

माँ से पूछा माँ ये दिए क्यों बना रही हो-प्रेम बजाज




मां , मां ये इतने सारे दिए क्यों बना रहे हो , अरे बेटा दिवाली आ रही है ना इसलिए ‌ ‌।
आहा जी दिवाली है , फिर तो ने कपड़े , मिठाई, और ढेर सारे खिलौने ले लोगे ना ।
हां, हां सब ले देंगे बेटा दिए बिक जाएं इस बार अच्छे से । सुनो जी इस बार तो लल्ला को बहुत सारे खिलौने ले के देंगे ।
हां भागवान , एक बार राम जी कृपा कर दें तो सब अच्छा ही होगा ।
दिवाली वाले दिन ...... मां दिए तो कोई भी नहीं खरीद रहा ,सब रंग-बिरंगी बल्ब की लड़ियां ही ले रहे हैं ‌
अब हम कपड़े , मिठाई कुछ भी नहीं लेंगे ।
इस बार दिवाली पे हम क्या करेंगे ? पैसे तो मिले नहीं बाबा को , हम अपना घर कैसे सजाएंगे ?
फिर राम जी हमारे घर नहीं आएंगे ना ? आपने कहा था राम जी सब पर कृपा करते हैं ।
हां बेटा इस बार राम जी ने हम पर कृपा की है , हम ये सारे दिए अपने घर में जलाएंगे , दियो से हम
अपना घर सजाएंगे , देखना फिर राम जी हमारे घर ज़रूर आएंगे । राम जी को दिए प्यारे हैं ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Friday, November 6, 2020

कंप्यूटर के सामान्य प्रश्नों के उत्तर दो....



Q.1. कंप्यूटर का जनक किसे कहा जाता है


(A) बिल गेट्स


(B) चार्ल्स बेबेज


(C) बेल्स पास्कल


(C) जोसेफ जैक्यूर्ड


Q.2. भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर है –


(A) सिद्धार्थ


(B) परम


(C) मेघा


(D) साइबर



Q.3. कम्पयूटर कौनसी भाषा पर कार्य करता है


(A) बेसिक भाषा


(B) कोबोल भाषा


(C) मशीनी भाषा


(D) फोरट्रान भाषा



Q.4. भारत का पहला कंप्यूटर कहाँ स्थापित किया गया था


(A) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली


(B) इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी, बर्नपुर


(C) भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु


(D) भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता

Q.5. डाटा प्रोसेसिंग का अर्थ है-


(A) डाटा संग्रहण


(B) डाटा को सजाना


(C) डाटा को उपयोगी बनाना


(D) उपरोक्त सभी



Q.6. सबसे तेज कंप्यूटर होता है


(A) मिनी कंप्यूटर


(B) माइक्रो कंप्यूटर


(C) मेनफ्रेम कंप्यूटर


(D) सुपर कंप्यूटर


Q.7. भारत में निर्मित 'परम कम्प्यूटर' किस प्रकार का कम्प्यूटर है


(A) माइक्रो कंप्यूटर


(B) मिनी कंप्यूटर


(C) मेनफ्रेम कंप्यूटर


(D) सुपर कंप्यूटर


Q.8. IMAC एक प्रकार का है


(A) मशीन


(B) प्रोसेसर


(C) प्रोग्राम


(D) रजिस्टर


Q.9. www के आविष्कारक कौन है


(A) Lee S Feyong


(B) Bill Gates


(C) Watson


(D) Tim Berner Lee


Q.10. कंप्यूटर के जनक एवं पिता किसे कहा जाता है


(A) बिल गेट्स


(B) चार्ल्स बाबेज


(C) लैरी पेज


(D) लेडी लारा


Wednesday, November 4, 2020

*❒ भारत की नदियाँ – सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी*



*● भारत की पवित्र नदी कौन-सी है—* गंगा
*● गंगा को बांग्लादेश में किस नाम से जाना
जाता है—* पद्मा
*● गंगा एवं ब्रह्मपुत्र की संयुक्त जलधारा किस नाम
से जानी जाती है—* मेघना
*● भारत की कौन-सी नदी सुंदरवन डेल्टा बनाती है
—* गंगा व ब्रह्मपुत्र
*● सांगपो नदी किस राज्य से होकर भारत में प्रवेश
करती है—* अरुणाचल प्रदेश
*● तवा किसकी सहायक नदी है—* नर्मदा
*● किस नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है
—* कोसी
*● कौन-सी नदी ‘बगाल का शोक’ कही जाती है—*
दामोदर नदी
*● कौन-सी नदी भ्रंश दोणी से होकर बहती है—*
नर्मदा
*● हाल ही में केंद्र सरकार ने किस नदी को
राष्ट्रीय दर्जा देने की घोषणा की है—* गंगा
*● प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी
है—* गोदावरी
*● भारत में बहने के अनुसार भारत की सबसे लंबी नदी
कौन-सी है—* गंगा
*● कावेरी नदी कहाँ गिरती है—* बंगाल की खाड़ी
में
*● पंजाब के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण नदी कौन-
सी है—* सिंधु
*● कौन-सी नदी पश्चिम की ओर बहती है और अरब
सागर में गिरती है—* नर्मदा
*● कौन-सी दो नदियों की लंबाई लगभग समान है—*
सिंधु (2880 किमी) व ब्रह्मपुत्र (2900 किमी)
*● कावेरी जल विवाद किन राज्यों के बीच है—*
कर्नाटक और तमिलनाडु
*● किस नदी को वृहद् गंगा के नाम से जाना जाता
है—* गोदावरी
*● कौन-सी नदी अपना मार्ग बदलने के लिए
प्रसिद्ध है—* कोसी
*● कौन-सी नदी ‘कपिल जलधारा प्रपात’ का
निर्माण करती है— नर्मदा
*● कौन-सी नदी ‘ओड़िशा का शोक’ कही जाती है
—* ब्राह्मणी
*● वैन गंगा और पैन गंगा किस की सहायक नदी हैं—*
गोदावरी
*● इंडोब्रह्मा है एक….. —*पौराणिक नदी
*● किस नदी पर सबसे लंबा सड़क पुल है—* गंगा
*● कौन-सी नदी विश्व का सबसे बड़ा द्वीप
‘मजुली’ बनाती है—* ब्रह्मपुत्र
*● नर्मदा नदी का अधिकांश भाग भारत के किस
राज्य में बहता है—* मध्य प्रदेश
*● नदियों को जोड़ने की योजना किसके शासन
काल में प्रस्तातिव हुई—* राजग सरकार
*● कौन-सी नदी रिफ्ट घाटी से होकर बहती है—*
ताप्ती
*● कौन-सी नदी पर भारत व पाकिस्तान का जल
समझौता हुआ—* सिंधु
*● सिंधु समझौते के अनुसार भारत सिन्धु नदी के
कितने % जल का प्रयोग कर सकता है—* 20%
*● प्रायद्वीपीय नदियों का उत्तर से दक्षिण की
ओर क्रम क्या है—* महानदी, गोदावरी, कृष्णा,
पेन्नार, कावेरी एवं वैगाई
*● कौन-सी नदी भारत के केवल जम्मू-कश्मीर राज्य
से होकर बहती है—* सिंधु नदी
*● पंचगंगा तथा दूधगंगा किसकी सहायक नदियाँ है
—* कृष्णा नदी
*● दामोदर नदी कहाँ से निकलती है—* छोटा
नागपुर के पठार से
*● दक्षिणी भारत के पठारी प्रदेशों को कौन-सी
नदी दो भागों में विभाजित करती है—* नर्मदा
नदी
*● शिप्रा नदी किसकी सहायक नदी है—* चंबल
नदी
*● भारत की कौन-सी नदी का मुहाना एवं उद्गम
स्थल दोनों भारत में ही है—* दक्षिण की ओर
*● किस नदी के किनारे पर प्रसिद्ध महाकालेश्वर
मंदिर है—* नर्मदा नदी
*● विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा किन नदियाँ द्वारा
निर्मित होता हैं—* गंगा एवं ब्रह्मपुत्र द्वारा
*● किस स्थान पर भागीरथी और अलकनंदा मिलकर
गंगा का निर्माण करती है—* देवप्रयाग में
*● अरावली पर्वत श्रृंखला किस नदी प्रणाली से
विभाजित होती है—* चंबल एवं साबरमती
*● लूनी नदी कहाँ गिरती है—* कच्छ का रन
*● तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से कौन-सी
नदियां निकलती हैं—* सतलज, सिंधु, ब्रह्मपुत्र
*● कौन-सी मुख्य प्रायद्वीपीय नदियां डेल्टा का
निर्माण नहीं करती हैं—* नमर्दा एवं ताप्ती
*● कौन-सी नदी बांग्लादेश में जमुना के नाम से
जानी जाती है—* ब्रह्मपुत्र
*● किस नदी को दूसरी गंगा के नाम से जाना
जाता है—* कावेरी नदी को
*● पेन्नार की सहायक नदियाँ कौन-सी है—*
पापाधनी एवं चित्रावती

बजरंग सेना के द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम




आर्यन तिवारी(औरैया):- आपको बताते चलें कि बजरंग सेना द्वारा आए दिन लोगों की मदद व कई अत्यधिक सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं उन्हीं में आज बजरंग सेना ने ग्राम बमुरीपुर के पास सुमन रानी महाविद्यालय से एक ट्रक जो कि छोटे – छोटे गौवंशो को उ0प्र079 सी0एन0 4276 में भरकर ले जाया जा रहा था! वही मौके पर बजरंग सेना के देहात मंडल उपाध्यक्ष अंकित त्रिपाठी गोपाल जी और जिलाध्यक्ष भगवा सेवक गोपाल तिवारी जिला कोषाध्यक्ष किसान मोर्चा भूरे दुबे जी को इसकी सूचना प्राप्त हुई तो उन्होंने तत्काल नजदीकी पुलिस को सूचना दी एवं पुलिस ने मौके से ट्रक को पकड़ा वही पुलिश की सूचना मिलते ही ड्राइवर एवं कंडक्टर फरार हो गए हैं ट्रक में करीब 40 गोवंश बरामद हुए हैं पुलिस के उच्चाधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी गोवंशो को सुरक्षित गौशाला में भेजा जाएगा!

Tuesday, November 3, 2020

अन्नू सेंगर को प्रदेश महासचिव युवा प्रकोष्ठ व अनुराग ठाकुर को प्रदेश महामंत्री मुख्य प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश बने

अन्नू सेंगर को प्रदेश महासचिव युवा प्रकोष्ठ व अनुराग ठाकुर को प्रदेश महामंत्री मुख्य प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश बने



आपको बताते चलें कि राष्ट्रीय महाराणा प्रताप युवा सेना भारत एक नया संगठन है जिसका गठन  राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत सिसोदिया व राष्ट्रीय संरक्षक सुरेश सिसोदिया जी के कर कमलों के द्वारा हुआ है  आपको बताए उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बिधूना तहसील से समाज सेवक के रूप में लोंगो के दिलों में जगह बना चुके अन्नू ठाकुर को प्रदेश महासचिव युवा प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश व अनुराग ठाकुर को प्रदेश महामंत्री मुख्य प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश  की जिम्मेदारी सौंपी गयी, लोंगो को पता चलते ही उन्होंने समाज सेवक अन्नू सेंगर व अनुराग ठाकुर को सोशल मीडिया के माध्यम लोंगो ने ढेरों बधाईयां दी। आपको बताएं ये एक सामाजिक संगठन है जिसका मुख्य कार्य एक जुट होकर के कार्यों का पूर्ण रूप से निर्वाहन किया जाएगा संगठन से जुड़े हुए सभी पदाधिकारियों ने संकल्प लिया है कि अपनी पूरी कर्मठता ईमानदारी व सक्रियता के साथ सभी दायित्वों का निर्वाहन राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए गए संकल्प को पूरा करेंगे। इस संगठन का राष्ट्रीय कार्यालय अकबरपुर महाराणा प्रताप नगर जिला मथुरा में बनाया गया है  जिससे कि संगठन में हो रही गतिविधियों का आदान प्रदान कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है  समाज सेवक अन्नू ठाकुर  व अनुराग ठाकुर ने बताया है कि यह् संगठन गरीबों के हक की लड़ाई  को लड़ेगा और उन्हें न्याय दिलवाने में मदद करेगा वहीं दूसरी तरफ जिस प्रकार से देश मे बहन बेटियों पर हो रहे हत्याचार को रोकने के लिए हर एक ठोस कदम उठाकर हो रहे हत्याचार को रोकने में सफल बनायेंगे। व जल्दी ही इस संगठन के विस्तार को लेकर एक सभा गठन किया जाएगा जिसमें जल्द ही पदाधिकारियों को पद नियुक्त कर जिम्मेदारी सौंपी जाएंगी।

Monday, November 2, 2020

करेंट अफेयर्स पर एक झलक डालिए




• जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा ने कहा है कि उनका देश जब तक शून्य‍ कार्बन उत्सलर्जन का लक्ष्यम हासिल कर लेगा-2050

• साल 2008 में भारत की अंडर -19 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे जिस खिलाड़ी ने सभी घरेलू क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा की- तन्मय मनोज श्रीवास्तव

• वह एयरलाइन जिसने भारत में अपने यात्रियों के लिए COVID-19 परीक्षण की सुविधा शुरू की है- स्पाइसजेट

• जिस राज्य सरकार ने सुमंगल वेब पोर्टल लॉन्च किया जो अंतर्जातीय जोड़ों को आवेदन के 60 दिन में प्रोत्साटहन राशि दिलाने में मदद करेगा- ओडिशा

• हाल ही में जिस राज्य में विधानसभा के विशेष सत्र में कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 पारित कर दिया गया- छत्तीसगढ़

• जिस सोशल मीडिया कंपनी की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने पद से इस्तीफा दे दिया- फेसबुक

• अमेरिका ने जिस देश को 2.37 अरब डॉलर में हार्पून मिसाइल की डील को मंजूरी दे दी है- ताइवान

• केंद्र सरकार ने देश में अनलॉक-5 के तहत सितम्बर में जारी किये गए दिशा निर्देश को जब तक के लिए बढ़ा दिया है-30 नवंबर

• केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए जितने अपराधियों को आतंकवादी घोषित कर दिया है-18

• भारत और जिस देश के बीच तीसरी टू प्लीस टू मंत्रिस्तिरीय वार्ता नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई- अमेरिका

नाम के ही नही दिल से और काम से राजा है राजा भैया


#परम्_आदरणीय_रघुराज_प्रताप_सिंह_जी (राजाभैया )

👉#एक_नजर_राजा_साहब_के_जीवन_पर
नाम के ही नही दिल के और काम से राजा है राजा भैया

इसमें अभी बहुत कुछ लिखना छूट गया है सिर्फ कुछ मुख्य बातों को ही दर्शाया गया है ध्यान से पढ़े 👇

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भइया प्रतापगढ़ के कुंडा विधान सभा से निर्विरोध विधायक चुन लिए गए थे ,,,महज़ 26 साल की उम्र में MLA बन जाना कोई बच्चो का खेल नहीं होता ,,,,,आज के लौंडे 26 साल में बिस्तर तोड़ते हुवे बाइक रेसिंग करते हैं ,,,,और आपको बता दें रघुराज प्रताप सिंह का नाम राजा भईया कोई ऐसे ही नहीं लिया जाता ,,,,वो वास्तव में राजा ही है ,,,प्रतापगढ़ के राजपूत भदरी रियासत के युवराज राजा भईया ,,,,जिनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर बॉलीवुड फिल्मे बना देता है ,,,,

,,,,राजा भइया के पिता भदरी रियासत के राजा श्री उदय प्रताप सिंह और उनकी माता श्री मति मंजुला राजे दोनों ही प्रतिष्ठित राज घराने से है ,,राजा भईया के दादा जी यानी श्री उदय प्रताप सिंह के पिता जी ,,,बजरंग बहादुर सिंह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे ,,उनके नेहरू जी मधुर सम्बन्ध थे और वो हिमांचल प्रदेश के राजयपाल भी रहे ,,,,और तो और राजा भईया के पिता उदय प्रताप सिंह संघ और विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी भी रहे हैं ,,,,,,,,और जान लीजिये राजा भईया से पहले उनके परिवार का कोई सदस्य राजनीति में नहीं आया था ,,इसलिए उन्हें राजनीति कोई विरासत में नहीं मिली ,,बल्कि खुद के व्यक्तित्व को उन्होंने अपने कर्मों से सिद्ध किया है ,,,,,


राजा भईया कोई अनपढ़ गवार नेता नहीं है ,,,,वो 1985 में भारत स्काउट गाइड स्कुल से दसवीं और इलाहाबद के इंटरमीडियट स्कुल से बारहवीं और लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ में स्नातक और इंडियन मेडीवल हिस्ट्री से दुबारा स्नातक है ,,,घुड़सवारी और निशानेबाजी में इन्हें महारथ हाशिल है और लखनऊ यूनिवर्सिटी से तीबारा मिलेट्री साइंस से स्नातक है ,,यानी ट्रिपल ग्रेजुएट,,,,,,,और एक खूबी है राजा भईया में वो साइकल से लेकर हवाई जहाज तक उड़ाना जानते है ,,उनके पास PVT एयर क्राफ्ट उड़ाने का लाइसेंस भी है ,,,,इनका विवाह बस्ती रियासत की राजकुमारी भानवी देवी से हुवा

अब इनके राजनितिक करियर के बारे में भी जान लीजिये ,,,,जब उन्होंने 1993 में राजनीति में कदम रखा ,,तो उन्होंने कोई लोकल चुनाव नहीं लड़ा जैसे जिला महापंचायत पार्षद BDC परधानी चुनाव ,,,,उन्होंने सीधे राज्य स्तरीय चुनाव लड़ा और सीधे विधायक बने ,,,,1999 में इन्होने राजकुमारी रत्ना सिंह के खिलाफ अपने चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को उतार दिया ,,राजा भइया के व्यक्तित्व के बल पर अक्षय भी चुनाव जीत गए ,,,जिस कुंडा सीट से राजा अभी लड़ते हैं उस सीट पे कभी कांग्रेस के नियाज खान का डंका बजता था ,,जो की 1962 से 1989 तक कुंडा के विधायक रहे लेकिन राजा भइया के बाद उनका वर्चस्व खत्म हो गया ,,,,राजा भइया लगातार विधायक  बने रहे और कभी किसी पार्टी से नहीं जुड़े ,,,बाद में समाजवादी पार्टी से और कल्याण सिंह की सरकार  में भी वो राजयमंत्री रहे ,,,,मुलायम सरकार  में वो केबिनेट मंत्री भी बने ,,,राजनाथ सिंह की सरकार  में भी वो केबिनेट मंत्री बने,,,,,,

2013  में कुंडा में जियाउल हक़ हत्याकांड में इनका नाम आने पे राजा भइया ने नैतिकता का परिचय देते हुवे खुद अपने पद से स्तीफा दे दिया ,,,फिर सीबीआई जांच में वो निर्दोष पाए गए ,,,उन्हें क्लीन चीट मिल गयी ,,,मायावती शाशनकाल में इनके पिता जी पर हथियार रखने के आरोप में कार्यवाही हुवी ,,,और उस समय समजवादी पार्टी के अमर सिंह ने राजा भइया के समर्थन में बड़ी बड़ी रैलियां निकाली थी ,,,,,

राजा भइया के महल में हर रोज़ हजारों गरीबों के लिए भोजन बनता है ,,और हर साल राजा भइया 101  गरीब लड़कियों का विवाह करते हैं ,,हर साल कुंडा में मुहर्रम के दिन राजा भईया के पिता उदय प्रताप सिंह रामायण का पाठ करते हैं जिसमे हज़ारो लोग शामिल होते है और प्रशाशन की फ़टी रहती है ,,,,,,,,हर रोज़ भदरी महल गरीब याचिकाकर्ताओं की भीड़ से भरा रहता है जो सिस्टम से त्रस्त होकर राजा भईया की शरण में आते है 
कुंडा में जब लोग सिस्टम से लड़ते लड़ते थक जाते हैं,,,टूट जाते हैं तब वहां जाते हैं जहाँ से कोई आज तक निराश  नहीं लौटा,,,जहाँ कागज़ पे खींची गयी कुछ लाइने सिस्टम को काम करने पर मजबूर कर देती है ,,,,,इन लाइनों में जो लोग खड़े रहते हैं उनमे ताकत आती है उस व्यक्ति  से जिसने अपने अस्तित्व को सिद्ध कर लिया है और अब वो व्यक्तित्व बन चूका है ,,,,,,राजा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भईया ,,,,क्यों की सिस्टम से लड़कर सिस्टम को बदलना मुश्किल है ,,उसके लिए सिस्टम में घुसना पड़ता है ,,,और तब इतिहास मजबूर हो जाता है इस बदलाव को स्वीकारने के लिए ,,,,,कुंडा का बेति जिसे राजा भईया का निवास कहा जाता है वो वहां के निवासियों के लिए हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट सब है ,,,


कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न 📕....भूगोल के नोट्स में 📕





*1. अफ्रीका महादेश का सबसे बड़ा शहर कौन-सा है?* – काहिरा

*2. हवाई जहाज प्रायः किस मंडल में उड़ते हैं?* – समताप मंडल में

*3. वैस्ट बैंक नामक क्षेत्र किस नदी के पश्चिम में स्थित भू-क्षेत्र है?* – जॉर्डन नदी

*4. मोनो कल्चर किस कृषि का विशिष्ट लक्षण है?* – स्थानांतरित कृषि

*5. कनाडा के मध्य अक्षांशीय घास मैदान क्या कहलाता है?* – प्रेयरी

*6. कालगुर्ली एव कुलगार्डी किसने खनन के लिए प्रसिद्ध है?* – स्वर्ण खनन के लिए

*7. डियागो गार्सिया द्वीप किस महासागर में स्थित है?* – हिन्द महासागर में

*8. ‘डॉल्फिन चैलेंजर कटक’ कहाँ अवस्थित है?* – अटलांटिक महासागर में

*9. विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील कौन-सी है?* – सुपीरियर झील

*10. किस प्राकृतिक प्रदेश को शीत मरुस्थल कहा जाता है?* – टुण्ड्रा प्रदेश

*11. किसे ‘सौरमंडल का जन्मदाता’ कहा जाता है?* – सूर्य को

*12. किस ग्रह को ‘संध्या का तारा’ कहते हैं?* – शुक्र को

*13. पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह कौन-सा है?* – चन्द्रमा

*14. सूर्य ग्रहण कब होता है?* – जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा आ जाता है

*15. 23 1/2° उत्तरी अक्षांश रेखा को क्या कहा जाता है?* – कर्क रेखा

*16. महासागरीय सतह का निर्माण किस प्रकार की चट्टान से हुआ है?* – अवसादी चट्टान से

*17. किलिमंजारो किस प्रकार का ज्वालामुखी है?* – मृत ज्वालामुखी

*18. विश्व में सर्वाधिक विस्तृत पर्वत कौन-सा है?* – वलित पर्वत

*19. विश्व का सर्वाधिक सूखाग्रस्त देश कौन-सा है?* – आस्ट्रेलिया

*20. हवाई द्वीप की किसने खोज की थी?* – जेम्स कुक ने

*21. ‘दक्षिण अमेरिका का द्वार’ किसे कहा जाता है?* – वेनेजुएला को

*22. वायुमंडल के किस भाग में जलवाष्प की कुल मात्रा का 90 प्रतिशत भाग पाया जाता है?* – क्षोभमंडल में

*23. नदी के मुहाने पर यदि ज्वारीय लहरों का प्रभाव हो, तो डेल्टा का निर्माण न होकर किस आकृति का निर्माण होता है?* – ज्वारनदमुख

*24. कौन-सा एक देश गेहूँ तथा चावल दोनों का संसार में सबसे बड़ा उत्पादक देश है?* – चीन

*25. शीतोष्ण कटिबंधीय घास मैदान ‘डाउन्स’ किस महादेश में है?* – आस्ट्रेलिया

*26. विश्व की सबसे बड़ी मैंगनीज खान’ अमापा’ किस देश में स्थित है?* – ब्राजील में

*27. किस महासागर की आकृति अंग्रेजी के 'S' आकार की है?* – अटलांटिक महासागर की

*28. माल्टा देश किस सागर में स्थित है?* – भूमध्य सागर में

*29. किन देशों की सीमाएं कैस्पियन सागर से लगी हैं?* – ईरान, अजरबैजान, कजाकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान व रूस

*30. काहिरा (मिस्र) किस जलवायु क्षेत्र में स्थित है?* – भूमध्यसागरीय जलवायु क्षेत्र में

*31. सौरमंडल का सर्वाधिक गर्म ग्रह कौन-सा है?* – शुक्र

*32. सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह कौन-सा है?* – शुक्र

*33. पृथ्वी के अलावा किस एकमात्र ग्रह पर जीवन की संभावना व्यक्त की जाती है?* – मंगल पर

*34. पृथ्वी की किस गति के कारण दिन और रात होते हैं?* – परिभ्रमण

*35. फ्रांस से होकर कौन-सी देशांतर रेखा गुजरती है?* – 0°देशांतर (ग्रीनविच रेखा)

*35. सबसे अधिक मात्रा में रेडियो सक्रिय-पदार्थ किस चट्टान से प्राप्त होता है?* – ग्रेनाइट चट्टान से

*37. ‘एल मिस्टी’ (EL Misti) ज्वालामुखी किस देश में स्थित है?* – पेरु में

*38. विश्व सबसे अधिक विस्तृत ब्लॉक पर्वत कौन-सा है?* – सियार नेवादा (कैलिफोर्निया)
*39. इंडोनेशिया की दो-तिहाई जनसंख्या का संकेंद्रण किन क्षेत्र में है?* – जावा, मदुरा और बाली क्षेत्र में

*40. उत्तरी अमेरिका तथा दक्षिण अमेरिका के मध्य कौन-सा जलडमरुमध्य है?* – पनामा जलडमरुमध्य

*41. खैबर का दर्रा किस देश में है?* – पाकिस्तान में

*42. क्षोभमंडल की धरातल से अधिकतम ऊँचाई कितनी है?* – 18 किमी.

*43. भारत की कौन-सी नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है?* – माही नदी

*44. विश्व में लम्बे रेशे के कपास का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश कौन-सा है?* – संयुक्त राज्य अमेरिका

*45. अमेजन नदी के दक्षिण में स्थित ब्राजील के मैदानी क्षेत्र में पाए जाने वाले उष्णकटिबंधीय घासभूमि को क्या कहते हैं?* – कैम्पोस

*46. विश्व प्रसिद्ध औद्योगिक क्षेत्र ‘रूर’ किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?* – कोयला

*47. उत्तरी सागर किस महासागर का एक भाग है?* – अटलांटिक महासागर का

*48. एशिया माइनर एवं दक्षिण रूस में स्थित अन्तर्देशीय सागर का क्या नाम है?* – काला सागर

*49. विश्व की सबसे बड़ी झील कौन-सी है?* – कैस्पियन सागर

*50. एशिया महादेश के सबसे उत्तरी भाग में कौन-सी वनस्पति पायी जाती है?* – टुण्ड्रा वनस्पति

*51. किस तारामंडल के तारे ध्रुवतारे को ओर संकेत करते हैं?* – सप्तर्षि

*52. सबसे कम घनत्व वाला ग्रह कौन-सा है?* – शनि 

*53. ‘पृथ्वी गोल है’-यह सर्वप्रथम किसने बताया?* – अरस्तू ने 

*54. पृथ्वी

Sunday, November 1, 2020

माडर्न बहु की हास्य कविता -प्रेम बजाज




पार्टी बुक करवाई है, सास की बरसी आई है ।
पीज़ा , बर्गर, नूडल्स और पासता का आर्डर कराया है ।
फिश, मटन ग्रेवी मँगाया, चिकन तड़का भी साथ में आया ।
विहस्की , रम, ठर्रा की बोतलें साथ में लेके गई होटल में ।
ताश की गड्ढी इक नही दो होंगी , क्योकि सहेलियाँ काफी ज्यादा है,
एक से काम ना चल पाएगा ।
डी.जे., वी जे भी होना चाहिए, वरना कहेगी सखी कँजुसी दिखाई ।
अरे अभी नई ड्रेस भी तो लानी है, पार्टी मे पहन के जानी है ।
साथ मे मैचिंग सैंडिल होगे , सेम कलर की ज्यूलरी होगी,
अरे , अरे पार्लर की बुकिंग तो भूल गई मै , अभी वो भी तो करानी है ।
सास मेरी की बरसी है, दोस्तो आज तो पार्टी होगी , मैंने पार्टी बुक कराई है ।

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है । तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण ...