Sunday, January 24, 2021

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज





सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी
क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है ।
तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण करने
का सौभाग्य मिला , कर्ज़दार हो उस इश्वर के
जिसने तुम्हें इस लायक समझा ।

मां को तो जन्म देने का अधिकार दिया ईश ने
अजन्मी बेटी को मारने का हक तुम कहां से ले आए ।
जो कहते बेटी महमान है , ग़र चली जाती है बेटी
तो क्या बेटे रूख़्सत नहीं होते , छोड़ कर उनके जाने
पर क्या उनके माँ-बाप नहीं रोते ।

बेटी सयानी होने पर अब किसी बाप के कँधे नहीं झुकते
अब तो बेटियां लहराती है परचम गर्व के , तोड़ देती है दम्भ
दरिन्दो ,लोभियों के ।
ग़र मारोगे कोख़ मे बेटी ,बहु कहाँ से लाओगे ।
बेटी को जीने का अधिकार दे दो , बस थोड़ा सा उसे प्यार दे दो ।
ग़र कर नहीं सकते तुम रक्षा बेटी की, दे नहीं सकते जीने का अधिकार उसे
तो किस हक से बालिका दिवस मनाते हो,
करते हो कन्या का पूजन मान देवी उसे उसके भक्त बन जाते हो।
एक तरफ तो करते पूजा बेटी की,
मगर दूजे की बेटी पर रख बुरी नज़र उसे फूल जैसा मसल डालोगे
तो भला अपनी बेटी की रक्षा कैसे कर पाओगे।
एक दिन गर्ल चाइल्ड डे मनाने से क्या होगा,
भला साल भर की अजन्मी कत्ल हुई, बलात्कार की शिकार,
तेज़ाब से जली बेटियों को क्या जीवन दे पाओगे।
ग़र नहीं तो छोड़ दो ढोंग ये (बेटी दिवस ) गर्ल चाइल्ड डे मनाने का। 🙏🏻



मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

Friday, January 22, 2021

नज़्म-प्रेम बजाज





ए वक्त ज़रा ठहर जाने को क्यूं बेकरार हुआ जाता है
आएगा मुझसे मिलने जिसके दिल से मेरा नाता है ।

हो गया है प्यार मुझे उनसे इसलिए बेताब हूं मैं
प्यार में ही तो इन्सान दिल की बाज़ी लगाता है ।

हार बैठा हूं सब कुछ अपना मोहब्बत में उनकी
मोहब्बत में हार कर ही तो जीता जाता है ।

ना कोइ शिकवा , ना शिकायत , ना ही गिला किया
क्यों कि प्यार में तो हर कोई दर्द ही पाता है ।

आ जाओ अब तो सनम दमें-आखिर आ चुका हमारा
* प्रेम * का तुम बिन अकेले दिल बहुत घबराता है ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Monday, January 4, 2021

नागा सेना का 120 वर्ष पुराना दृश्य।



ढूंढाड़ क्षेत्र (जयपुर) को लगातार 200 साल व 33 युद्धों में भाग लेकर त्यागमयी सेवा और कुर्बानी देने वाली - नागा सेना का 120 वर्ष पुराना दृश्य। 

नागा सेना ने वर्ष 1779 में बादशाह शाहआलम द्वितीय के सेनापति मुर्तजा खां भड़ेच को उसके हाथी सहित मार दिया था। जिसमे बादशाह के लगभग 50 हजार सैनिक खाटू श्याम के मंदिर पर हमला करने आए थे। 

प्रमाणिक तथ्य को इस युद्ध में दादू संत मंगलदास महाराज जी सिर कटने के बाद भी झुंझार बन लड़ते रहे।

राजपुताने का इतिहास ऐसे वीरों के उल्लेख के बिना अधूरा हैं।

Sunday, January 3, 2021

कोई तो समझें किसान की व्यथा-प्रेम बजाज




सुबह के 4 बजे का समय है सुखिया अपने खेतो पर जा रहा है फ़सल को पानी देने और रास्ते में देखता है काशी राम जिनका खेत रास्ते में आता है, वो मेढ पर पानी रोकने के लिए अपने बेटे को बैठाया हुआ है, और बच्चा ठंड में पानी में बैठा कांप रहा है।
" काशी भाई राम- राम "
" अरे राम- राम सुखिया, खेत पर था रहे हो?"
" हां भई, इस समय तो खेत पे ही जाना है, अर्रेएएएएएए ये क्या, मेढ पर छोरे को क्यों बैठा रखा ? उसे बिमार करेगा क्या?"
" भई पानी नहीं रूक रहा था, कल भी मिट्टी चढ़ा के गया था, देख फिर उतर गई, अब होर तो कोई चारा ना है"
" अरे तो छोरे को मारेगा क्या? मासूम जान, और उपर से इतने कड़ाके की ठंडी, जो छोरे को कुछ हो गया तो क्या करेगा"?
" होर कोई चारा भी तो नहीं ना,
" भाई मेढ पक्की क्यों नहीं बनवा लेते ?"
" अरे सुखिया किस-किस चीज़ के लिए उधारी लूं, और फिर चुकाना भी तो है, कहां से चुकाऊंगा साहुकार का पहले ही इतना कर्जा है सिर पर" !
" हां भाई ये तो है , पिछली फसल का पूरा पैसा मिल जाये तो कुछ काम भी ठीक से हो जाए, कहां से लाएं, घर का खर्च करें या खेत का, आधा तो जमींदार खा जाता है, उसके बाद आढ़ती ले लेता है, सरकार तक फसल पहुंचते-पहुंचते आधी कीमत तो रास्ते में ही खत्म हो जाती है, बाकी जो आधी पल्ले पड़ती है, उसमें से तो खेत का खर्चा ही मुश्किल से निकलता है, और कभी राम जी की मर्जी ना हो तो फसल भी ढंग से नहीं होती, कभी तो राम जी बारिश ही नहीं करते सुखा पड़ने से फसल नहीं होती और कभी बिन बादल बरसात हो जाए तो खेतों में बाढ़ सी आ जाती है, तो भी फसल खत्म ।
" हां काशी भाई हम किसानों के तो कर्म ही खोटे है, हम अपनी धरती मां का सीना चीर कर नए-नए अंकुर निकालते हैं, जेठ की तपती दोपहरी में जब लोग कूलर, ए.सी. में सोए होते हैं, हम खेतों में काम करते हैं, पूस की ठिठुरती सर्दी में जब लोग बंद कमरों में कम्बलों में दुबके होते हैं, हम आधी- आधी रात को खेतों में पानी के बीच खड़े हो काम करते हैं, इतनी मेहनत-मश्शकत के बाद भी साहुकार के हमेशा कर्जदार ही रहते हैं , अगर सरकार एक मुल्य नियत कर दे तो कोई भी हमें धोखे में नहीं रख सकता और ना ही कोई बिचोलिया हमारी मेहनत की कमाई खा सकता है, पर कौन सुने हम किसानों की व्यथा!"
" लेकिन सुखिया ऐसे कब तक चलेगा, ना तो हम अपने बच्चों को बड़े स्कूल में पढ़ा सकते हैं, ना ही हम सुख- चैन की जिंदगी जी सकते हैं, सब को रोटी देने वाले को भी कभी-कभी भूखा सोना पड़ता है, कुछ ना कुछ तो इसका हल निकालना ही होगा ना, वरना तो आने वाली नस्लें तो खेती और किसानी के नाम से दूर रहेंगी, कोई भी किसानी करना नहीं चाहेगा"!
" काशी भाई कह तो आप सही रहे हो, इश्वर की कृपा से मेरे बुजुर्गो की बहुत जमीन जायदाद थी तो मैंने अपने छोटे भाई को अचछा पढ़ा दिया, नहीं तो इस कमाई में तो रोटी भी मुश्किल है, मैंने तो छोटे से कह दिया कि पढ़ाई खत्म करते ही, गांव में खेती करनी है, बस काशी भाई थोड़ा इंतजार और मेरे भाई ने अर्जी लगा दी है , जल्दी ही वो सरकार से बात करेगा और हमारा धान सीधा सरकार के पास पहुंचेगा और हमें सही दाम मिलेगा, और उसकी पढ़ाई भी मैंने कृषि की कराई है, जिससे वो हमें ऐसे नए-नए तरीके बताएगा खेती के जिससे फसल भी अच्छी हो"!
" हां सुखिया अब तो तेरे भाई का ही इंतजार है, शायद उसके प्रयास से ही कोई समझे हम लोगों की व्यथा, कोई तो निकाले उसका हल"!

मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

Monday, December 28, 2020

उपर वाला कमरा- प्रेम बजाज




राजेश महरोत्रा एक नामी कपड़े के व्यापारी , मुम्बई में अच्छा बड़ा कपड़ों का शोरूम , इकलोता बेटा है साहिल , इसलिए उसकी हर ख्वाहिश पुरी की जाती ।
वो कुछ समय अमेरिका रहना चाहता है , इसलिए राजेश महरोत्रा उसे अमेरिका भेज देते हैं , यहां का बिजनेस राजेश जी देखते हैं , नौकरी की फौज तो है ही साथ में , बस इश्वर की कृपा से सब बहुत बढ़िया चल रहा है ।
आज लगभग एक साल होने को आया , राजेश जी बहुत परेशान हैं ।
कारण ..... उनके घर में एक लड़की राधा लगभग 18 --- 19 साल की काम करती थी , दिन-रात यही राजेश जी के घर पर ही रहती थी , बहुत नेक , मेहनती और अच्छी लड़की थी ।
ना जाने क्या हुआ एक दिन उसने आत्महत्या कर ली । तब से राजेश जी बहुत परेशान हैं कि राधा ने आत्महत्या क्यों की ।
जिस समय सुबह-सुबह आ के राजेश जी की बीवी रश्मि ने आकर बताया कि राधा ने आत्महत्या कर ली , राजेश जी हड़बड़ा कर उठे और सबसे पहले उन्होंने पुलिस को फोन किया , और थोड़ी ही देर में पुलिस आ गई और तहकीकात शुरू हो गई , लेकिन अभी तक राधा की आत्महत्या का मामला सुलझा नहीं ।
राजेश महरोत्रा का आलीशान घर , तीन बैडरूम वाला , उपर दो कमरे बने हैं , पीछे बैकयार्ड में सर्वेंट क्वार्टर हैं । एक क्वाटर में एक परिवार रहता है ।
राधा के माता-पिता कहीं दूर गांव में रहते हैं , वो राजेश जी के घर पर रहती है इसलिए अकेली होने की वजह से उसे क्वाटर में नहीं रखा गया , उसे रहने को उपर वाला कमरा दे दिया गया ।
रोज़ सुबह-सुबह 6 बजे राधा आकर रश्मि को चाय देती थी , लेकिन उस दिन सूरज सर पर चढ़ आया सात बज गए चाय नहीं आई , तो रश्मि ने राधा को आवाज़ लगाई , लेकिन कोई उत्तर ना पाकर रश्मि उपर उसे देखने चली गई कि आज तक ऐसा नहीं हुआ , कि राधा इतनी देर तक सोती रहे , शायद तबीयत ख़राब हो ।
जाकर दरवाजा खटखटाने लगी तो देखा दरवाजा खुला था और राधा बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी , बहुत बुलाने पर ,हिलाने - डुलाने पर जब राधा ने कोई प्रतिक्रिया नही की तो रश्मि  का दिल धक-धक करने लगा , एक अनजानी शंका ने घेर लिया , और वो जल्दी से नीचे आई और महरोत्रा जी को जगाया और राधा के बारे में बताया ।
महरोत्रा जी ने उसी पल पुलिस को फोन कर के बुला लिया , पुलिस आई और लाश को पोस्टमार्टम के लिए लेजाया गया , लेकिन आज एक साल से  राधा का केस ज्यूं का त्यूं है कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा , राधा के मां- बाबा रोज़ शहर आ- आ कर थाने के चक्कर काट कर थक गए ,लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा कि राधा ने आत्महत्या क्यों की ।
दो साल पहले राधा को उसके मामा गांव से लाए थे जो राजेश जी के शोरूम में काम करते थे , बोले .... साहब किसी काम पे रख लो , चार पैसे भी कमा लेगी , कुछ ढंग के तौर-तरीके भी सीख लेगी । तो राजेश जी ने बीवी से सलाह  मशवरा करके उसे घर पर रख लिया । घर में वैसे तो दो - तीन  नौकर  थे ही , मगर ये भी घर का काम अच्छे से देख लेती थी , इसके आने से रश्मि को बहुत आराम मिला था , रश्मि का लगभग सारा काम राधा सम्भाल लेती थी ।
सुबह-सुबह रश्मि को चाय देना , फिर नाश्ते में मदद कराना , इस तरह से रश्मि को काफी सहारा मिल जाता था । अब रश्मि को आने - जाने की भी परेशानी नहीं रही , वो जानती थी उसके घर ना होने पर रश्मि सब संभाल लेगी ‌।
लेकिन इस समय रश्मि का भी चिंता से बुरा हाल था , उसे समझ नहीं आ रहा कि राधा की आत्महत्या का कारण क्या है ,  वो राजेश से रोज़ पुलिस से बात करने को कहती कि पुलिस किसी नतीजे पर क्यों नहीं पहुंच रही कि ये हत्या है या आत्महत्या , और क्यूं और कैसे ? 
राजेश का बेटा साहिल  भी अमेरिका से अब वापिस आ गया ,उस की शादी की चर्चा चल रही है , घर में अब राधा की जगह दूसरी नौकरानी  शीतल  रखी गई है , राधा वाला कमरा उसे दिया गया  । 
साहिल  की शादी तय हो गई , और  धुमधाम से शादी हुई । साहिल हनीमून से लौट कर अपने पापा राजेश जी का बिजनेस संभाल लेता है , घर में दो सदस्य आने से घर की रौनक बढ़ गई है लेकिन रश्मि को चैन नहीं , रह - रह कर उसे राधा का ख्याल आता है , और एक दिन वो खुद पुलिस के पास जाती है , राधा के केस के बारे में जानने के लिए ।
 " इंस्पेक्टर , क्या अभी तक राधा के बारे में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे आप लोग , आखिर हुआ क्या था ? हत्या या आत्महत्या ? और क्यूं और कैसे हुआ ये सब ? 
" मिसेज महरोत्रा आप  बेवजह परेशान हो रही है , जब कुछ सुराग ही नहीं मिला तो हम क्या कर सकते हैं ।
निराश हो कर रश्मि घर वापिस आ जाती है ।
और एक दिन  सुबह शीतल पुलिस को फोन कर के बुलाती है ,और पुलिस  को राजेश जी को अरेस्ट करने को कहती हैं ।
मिसेज महरोत्रा.... शीतल ये सब क्या है , तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम अपने देवता जैसे मालिक को अरेस्ट करने के लिए कह रही है । "
इंस्पेक्टर भी शीतल से ....  तुम इस घर की नौकरानी हो और अपनी औकात में रहो , मालिक के बारे में बोलने से पहले कुछ तो सोचा होता ।
माफ़ किजिए महरोत्रा साहब इसने हमें झूठ  से कह दिया कि आप ने बुलाया है , राधा के बारे में कुछ बात करनी है , हम आप का फोन भी ट्राई कर रहे थे , लेकिन आप कि फोन भी नहीं लग रहा था , इसलिए हम चले आए , शीतल जाओ और अपना काम करो ।
राजेश महरोत्रा अवाक् से ये सब देख - सुन रहे हैं , उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा कि ये सब क्या हो रहा है ।
शीतल अपना आई. कार्ड दिखाती है  जिसे देख कर इंस्पेक्टर उसे सेल्यूट करता है , राजेश जी पूछते हैं कि ये सब क्या है , तब शीतल बताती है कि वो ही. आई. डी. इंस्पेक्टर है , और राधा केस की छानबीन करने आई है ।
इंस्पेक्टर... " लेकिन मैडम हमारे पास ऐसी कोई इंफॉर्मेशन नहीं थी । 
"" क्योंकि आप सब महरोत्रा जी के साथ हैं , हमें उपर से आर्डर था कि केस की छानबीन गुप्त तरीके से हो , और आप लोगों को किसी को भी कुछ नहीं बताना । 
"" तो मैडम क़ातिल कौन है ?
" राजेश महरोत्रा 
इंस्पेक्टर और राजेश महरोत्रा दोनों अवाक से इंस्पेक्टर शीतल को देखते  हैं ।
शीतल सारी कहानी बताती है ... कि राधा इनके घर पर अच्छे से काम कर रही थी , रश्मि उसे बेटी जैसे समझती थी , इसलिए कभी - कभी रश्मि को कहीं जाना होता तो राधा घर संभाल लेती थी , एक बार रश्मि का भाई बीमार था और रश्मि मिलने गई , उसे वहां तीन - चार दिन लग गए ।
पीछे से राधा और राजेश जी अकेले थे , रात को जब आने के बाद राधा अपने कमरे में जाकर सो गई तो अचानक राजेश जी को याद आया कि कल उन्हे किसी काम से सुबह जल्दी जाना है तो वो राधा को ये कहने उसके कमरे में गए कि सुबह जल्दी उठ कर नाश्ता बना दे , लेकिन जब वो कमरे में गए तो राधा गहरी नींद में थी और उसे इस तरह से सोया देख राजेश के अन्दर भी काम अंगड़ाई लेने लगा , और वो राधा के करीब लेट गया और उसे बाहों में भर लिया , मजबूत पकड़ में आने के कारण राधा की नींद टूटी , पहले तो उसने खुद को छुड़ाने की कोशिश की , मगर चढ़ती जवानी वो भी बहक गई और आत्मसमर्पण कर दिया , और दोनों बह गए काम के वेग में , दोनों को लत लग गई एक दूसरे की , जब भी मौका देखते काम पिपासा बुझा लेते , राधा के अन्दर एक जीव  सांसे लेने लगा था ,  राजेश ने वादा किया था कि रश्मि को तलाक देकर ,उसे घर , पैसा , प्यार, सब देगा वो  चहकने लगी थी और इसी चहक में वो एक गलती कर गई  , पड़ोस की बाईं मीरा से उसकी अच्छी दोस्ती थी , और वो बातों- बातों में उसे बता गई ।
और एक दिन  रश्मि मार्केट गई थी तो राधा ने राजेश को घर बुलाया और कुछ पेपर साइन करने को कहा , जिसमें उसकी प्रोपर्टी की आधी की उसका आने वाला बच्चा मालिक  होगा , राजेश जी ने उसे कहा कल वो अपने वकील को बुला कर कोई ना कोई फैसला कर देंगे । मामला आर या पार कर देंगे , राधा बहुत खुश थी उस दिन, उसने मीरा को भी बताया ।
और रात को राजेश जी ने उसका गला घोंट कर मार डाला , किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई ।
लेकिन मीरा ने अपनी मालकिन को सब बताया तो उन लोगों को शक हो गया और उन्होंने अपना शक ज़ाहिर किया , और पुलिस चोकन्नी हो गई , मैं सी. आई. डी. इंस्पेक्टर आपके घर में नोकरानी बन कर आई ताकि मैं घर में रह कर जानकारी हासिल कर सकूं , उपर वाले कमरे में से एक फोटो के पीछे मुझे एक डायरी मिली , जो राधा कभी कभी लिखती थी , उस दिन भी उसने उस डायरी में सब कुछ लिखा था , जिसमें उसने यह भी लिखा है कि आप कल मैडम को तलाक देकर  उसे ओर उसके होने वाले बच्चे को जो आपके प्यार की निशानी है अपना लोगे । और उसी रात उसकी मौत , रिपोर्ट भी अपने गायब करवा दी , जो कि हमने डाक्टर से निकलवा ली है , जिसमें साफ ज़ाहिर है कि राधा प्रेगनेंट थी और उसका गला घोंट कर मारा गया , सारे सबूत राजेश जी के ख़िलाफ़ थे , अब उनकी पैसा खाई पुलिस भी कुछ नहीं कर सकती उन्हें राजेश जी को अरेस्ट करना ही था ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

ठिठुरते पाले में थोड़ा चैन तो दिलाओ-प्रेम बजाज




शीतल बयार बहती है, ठिठुरन बढ़ती जाती है,
सुरज छिप कर बैठ गया, पूस के ठंडे दिनों में,
पानी भी बर्फ सा जमता जाता है, बादल जैसे
घूम रहा धरती पर, कोहरा ऐसा छाया है, बदन
कांपता सर्द हवाओं से, हाथ-पांव भी लगे हैं
ठिठुरने पाले से, करते विनती सूर्य देव से, आ कर
दर्श दिखाओ ना, अपनी तेज किरणों से हमको थोड़ा
तपाओ ना, इस ठिठुरते पाले में थोड़ा चैन तो दिलाओ ना।
छोड़ रजाई तनिक हम भी देखे बाहर की ओर, लेकर हाथ
में गर्मागर्म चाय का प्याला,थोड़ी सेंकने धूप , रहम करो
ज़रा तुम उन पर पड़े जो किनारे सड़क के,ना कोई गद्दा,
ना रजाई पास उनके, ठंड में ठिठुरती हडि्डया उनकी,
पाले से किटकिटा रहे दांत हैं, डालो तपती किरणें उन पर,
ठंड से जो हो बेहाल रहे ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

हम लिखते वो अफसाना लोग-प्रेम बजाज



कहते सुना है लोगों को हम लिखते हैं,
रो दे पड़ने वाला वो अफसाना लिखते हैं।

बर्बाद होना पड़ता है प्यार में हमेशा,
वरना आसानी से रिश्ते कहां निभते हैं।

प्यार में यार के इस क़दर डूबे हैं हम,
खड़े उसके लिए सरे बाज़ार बिकते हैं।

रोते हैं चुपके-चुपके याद में उसकी हम,
मगर सारे जहां को हंसते हुए दिखते हैं।

कहने को तो सोते हैं मखमल के गद्दे पर,
जुदाई में यार की अंगारों पर सिकते हैं।

ढुंढते फिर रहे हैं उन्हें कुल जहां में हम,
इसलिए एक जगह कहां हम टिकते हैं।

पढ़ोगे "प्रेम" को तो रो दोगे तुम भी
वो दर्दे-दिल, ज़ख़्म-ए-जिगर लिखते हैं।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है । तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण ...