ए वक्त ज़रा ठहर जाने को क्यूं बेकरार हुआ जाता है
आएगा मुझसे मिलने जिसके दिल से मेरा नाता है ।
हो गया है प्यार मुझे उनसे इसलिए बेताब हूं मैं
प्यार में ही तो इन्सान दिल की बाज़ी लगाता है ।
हार बैठा हूं सब कुछ अपना मोहब्बत में उनकी
मोहब्बत में हार कर ही तो जीता जाता है ।
ना कोइ शिकवा , ना शिकायत , ना ही गिला किया
क्यों कि प्यार में तो हर कोई दर्द ही पाता है ।
आ जाओ अब तो सनम दमें-आखिर आ चुका हमारा
* प्रेम * का तुम बिन अकेले दिल बहुत घबराता है ।
मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

No comments:
Post a Comment