.......सजना है मुझे सजना के लिए .............
...................जी हाँ दोस्तो आजकल तो सब के होंठ यही गुनगुना रहे होंगे,
और सब खूब शोपिंग मे बिज़ी होंगे बडी़ लम्बी चौडी़ लिस्ट बना कर ।
.सब की लिस्ट लगभग एक सी ही होती है । सब सखियाँ अपने पिया से यही माँग करती है ।
माथे अपने का तिलक लगा कर चाँद सी इक बिँदिया सजा दो,
सिँदूर के लाल रँग से मेरी पिया तुम माँग भरा दो ।
हीरा, मोती, सोना, चाँदी, कुछ नही चाहिए मुझको साथी ।
काँच की मुझ को चुडी़ ला दो, लज्जा के गहने बना कर, बाँहो की इक कँठी पहना दो ।
नैनो का काजल बने तेरे सपने, होठों की लाली मुस्कराहट को बना दो ।
अरमानो की साडी़ ला दो, स्वाभिमान की चुनर औढा़ दो , प्यार का उसपे गोटा लगा दो ।
प्रेम-बँधन की पायल मै बाँधु, इँद्रधनुष के बिछुए पहना दो ।
इज़्ज़त की इक कार ला दो, उसमे बैठा के सैर करा दो ।
खुशियो के तुम तोहफे ला दो, गिनती उनकी करना ना तुम, बस उनके तुम ढेर लगा दो ।
सात फेरो का वचन निभा दो, अर्धाँगिनी का तुम दर्जा दे दो ।
साथ चलने का हक भी दे दो, कभी ना छोड़ कर जाने का इक वादा दे दो ।
स्वाभिमान से जीना दे दो, अपने घर की इज्ज़त बना दो ।
देखे ना कोई बुरी नज़र से, अपनी नज़र की ढाल बना दो ।
ऐसा मोहे सज दे साँवरिया, लग जाए मोहे तोरी नज़रिया ।
साए के जैसे संग रहुंगी , बन कर दीप तेरी राह में जलुंगी , दुःख- सुख
में सदा मैं संग रहुंगी , प्यार की ठंडी छांव करूंगी ।
लांघ कर आई तेरी चौखट , इस चौखट पर ही प्राण तजुंगी ।
मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

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