कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर के सिनेमा घर बंद हैं। सिनेमा, थिएटर शुरू भी होंगे तो कुछ दिन लोग सिनेमा घरों में जाने से डरेंगे। परंतु कोरोना के आने से पहले ही सिनेमा घरों और मनोरंजन परोसने वाले टीवी चैनलोे को एक तीसरा पर्दा शिकस्त दे रहा है। यह है इंटरनेट का डिजिटल प्लेटफार्म। इसके बारे में जानने से पहले थोड़ा पीछे चलते हैं।
एक जमाना था, जब गांवों में नाटक कंपनियां नौटंकी डेरा-तंबू डाल कर पेट्रोमेक्स के उजाले में नाटक या नौटंकी दिखाती थीं। उस समय इस तरह की नाटक कंपनियां या नौटंकी कंपनियां एक से बढ़ कर एक नाटक दिखाती थीं। उन दिनों मुंबर्द में भी थिएटर का जमाना था। प्रवीण जोशी, सरिता या पद्मा रानी का जमाना था। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी नौटंकी कंपनियां धूम मचाए थीं। फिल्मों के आने के बाद भी सालों तक नाटक-नौटंकी होती रहीं। परंतु मल्टी प्लेक्स और टीवी सैकड़ो चैनल्स के आने के बाद लोगों में नाटक या नौटंकी के प्रति आकर्षण बहुत कम रह गया है।
सिनेमा के आगमन के बाद पहले 35 एमएम की फिल्में प्रदर्शित होती थीं। उसके बाद सिनेमास्कोप आया। ‘शोेले’ जैसी फिल्म 70 एमएम के पर्दे पर रिलीज हुई। इसमें हॉलीवुड में बनी फिल्म ‘मेकेंन्नाज गोल्ड’ एक जबरदस्त एक्शन फिल्म थी। इसमें स्टिरियोफोनिक ध्वनि और अंत में डोल्बी डिजिटल जैसी टेक्निक आई। अब लोगों के हाथों में स्मार्ट फोन आने के बाद बड़े पर्दे का बहुत ज्यादा आकर्घण नहीं रहा। टेलीविजन के आगमन के बाद बड़े पर्दे का महत्व वैसे ही घट गया था, पर अब सिनेमा के बड़े पर्दे और टीवी के छोटे पर्दे के बीच एक नया प्लेटफार्म विकसित हुआ है। डिजिटल पलेटफार्म नाम का यह तीसरा पर्दा अब मैदान में है। अगर आपके घर में स्मार्ट टीवी है और टीवीं इंटरनेट के साथ जुड़ा है तो नेटफ्रिलक्स, अमेजोन प्राइम वीडियो, ऑल्ट बालाजी, जी फाइव, हॉट स्टार जैसे ओटीटी प्लेटफार्म भी अब मनोरंजन के लिए उपलब्ध हैं। ये सभी माध्यम अब एक नई सोच वाला शो लेकर आ रहे हैं, जो दर्शकों में चर्चा का विषय बन रहे हैं। पिछले साल ‘सीक्रेट गेम्स 2’, ‘द फेमिली मैन’, ‘बार्ड आफ ब्लड’, और मेड इन हेलन’ जैसी डिजिटल सिरीजें दर्शकों में खूब प्रिय रहीं। इस तीसरे पर्दे की सफलता को देख कर अब अक्षय कुमार जैसे एक्टर और करण जौहर जैसे बड़े-बड़े निर्माता भी ओटीटी फ्रलेट प्लेटफार्म पर मनोरंजन का मसाला ले कर आ रहे हैं। 2020 के साल में टेलीविजन पर आते परंपरागत धारावाहिकों के सामने यह तीसरे पर्दे का नया माध्यम और मजबूत तथा प्रभावशाली होगा। इस पर बड़े-बड़े शोज और बड़े-बड़े स्टार देखने को मिलेंगे।
2020 के साल में मनोरंजन का खजाना खोल देने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओटीटी प्लेटफार्म, नेटफ्रिलक्स के संस्थापक और सीईओ रीड हेस्टिग्ंस ने अभी जल्दी ही घोषणा की है कि उनकी कंपनी भारतीय दर्शकों की रुचि के अनुसार भारतीय कंटेंट तैयार करने में जुटी है। उनकी कंपनी भारतीय कंटेंट वाली सिरीज तैयार करने के लिए 7000 करोड़ की रकम खर्च करने को तैयार है।
टाइम्स के ओटीटी डिजिटल प्लेटफार्म एमएक्सप्ले पर अभी जल्दी ही ‘क्वीन’ नामक वेबसिरीज ने खूब दर्शक बटोरे। ‘क्वीन’ की कहानी तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित है। सन् 1990 में मशहूर अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल ने एक टॉक शो में जयललिता से एक घंटे तक बातचीत की थी। जिसमें लेजंडरी पूर्व अभिनेत्री तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने जीवन के तमाम पत्ते खोले थे। उस टॉक शो के बीस साल बाद उसी बातचीत को कहानी के रूप ढ़ाल कर ‘क्वीन’ वेबसिरीज में रूपांतरित किया गया है। इस वेबसिरीज में जयललिता का प्रेम, नफरत और राजनीति में आने की जबरदस्त तड़प को दर्शाया गया है। अलबत्ता ‘क्वीन’ सिरीज मेें ऐसी भी तमाम बाते हैं, जो जयललिता के प्रशंसकों कसो पसंद नहीं आईं। ‘क्वीन’ वेबसिरीज के बदले फिल्म होती तो इसके निर्माता को अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता, क्योंकि फिल्म सिनेमा घर में देखी जा सकती है, जबकि वेबसिरीज इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल फोन या टीवी पर डिजिटल माध्यम से देखी जा सकती है। इस वेबसिरीज में ‘क्वीन’ का रोल रम्या कृष्णन ने किया है।
इसी तरह पिछले साल नेटफ्रिलक्स पर लीला नाम की एक वेबसिरीज रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों ने खूब देखी। यह वेबसिरीज चर्चित भी रही। इसके अलावा ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ के जीवन पर बनी ‘द क्राउन’ नाम की एक वेबसिरीज भी काफी चर्चित रही है। इसमें ब्रिटेन के रॉयल परिवार की तमाम अनकही बातें दिखाई गई थीं। ‘हाउस आफ कार्ड्स’ नाम की एक वेबसिरीज ने अमेरिका के प्रेसीडेंट के वाशिंग्टन के आधिकारिक निवासस्थान व्हाइट हाउस के अंदर की राजनीति की बातें उजागर की गई थीं। हरियाणा की एक महिला पुलिस कांस्टेबल के संघर्ष पर बनी ‘सोनी’ नामक वेबसिरीज भी लोगों ने नेटफ्रिलक्स पर खूब देखी।
देखने वाली बात यह है कि कोई चर्चित फिल्म सिनेमा घरों, थिएटरों में रिलीज होती है औद दर्शकों को उसमें कुछ आपत्तिजनक लगता है तो दर्शक थिएटरों में तोड़फोड़ कर सकते हैं। परंतु इंटरनेट के माध्यम से टीवी या स्मार्ट फोन पर तो सिर्फ देख सकते हैं। भारत में 46 करोड़ इंटरनेट का उपयोग करने वाले हैं।
लोग इस तरह की वेबसिरीज अपने डेस्कटॉप, लैपटॉप, आईपैड या मोबाइल फोन पर ही देख सकते हैं। इस तरह देखा जाए तो यह एक प्रकार का डिजिटल प्लेटफार्म एक नया जादुई बॉक्स है। सवाल यह है कि इस प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली वेबसिरीजों में सेंसरिाप का कोई नियंत्रण संभव नहीं है। ये तमाम प्रकार के नियंत्रणों से बाहर हैं। इसलिए इसमें कोई भी कंटेंट रिलीज किया जा सकता है। किसी के मन को ठेस पहुंचाने वाला भी काम हो सकता है। इसीलिए डिजिटल मीडिया को भी नियंत्रण में लाने की जोरदार मांग हो रही है। भारत में पोर्न साइट्स पर नियंत्रण है, फिर भी लोग उसे देख सकते हैं।
हां, अगर डिजिटल मीडिया स्वच्छंद और अनियंत्रत हो जाए तो यह समाज, देश और आने वाली नई पीढ़ी के लिए अनेक मुश्किलें खड़ी कर सकती है। परंतु ये बात भी एक हकीकत है कि देश में अब इंटरनेट की स्पीड बढ़ रही है, उसके साथ-साथ डिजिटल कंटेंट अन्य मनोरंजन के मुकाबले अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है। वेबसिरीज के निर्माताओं का मानना है कि सन् 2019 का साल डिजिटल इंडस्ट्री के लिए स्वर्ण साल रहा है। इससे यही लगता है कि मनोरंजन का पर्याय बदल रहा है।
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए, सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)

No comments:
Post a Comment