Thursday, December 3, 2020

एक लड़की पहेली सी -प्रेम बजाज




मै जब भी आफिस जाता , अक्सर बस स्टैंड पर एक लड़की मुझे नज़र आती , जैसे ही बस आकर रूकती, हम सब में बस पे पहले चढ़ने की होड़ सी लग जाती , लेकिन वो इत्मीनान से खड़ी रह कर पहले औरों के चढ़ने देती और फिर खुद चढ़ती, और अगर बस मे जगह ना हो तो वो नीचे ही खड़ी रह जाती , अगर चढ़ जाती तो कोई बुज़ुर्ग या बच्चा होता तो बैठने के लिए पहले उसे सीट देती ।

अक्सर मैं देखता बस मे अगर किसी का बच्चा परेशान करता या रोता तो ना जाने क्या जादू था कि वो उसे गोद में लेकर झट से चुप भी करा देती और बैग से निकाल कर उसे चाकलेट भी देती ।मै बस उसे देखता ही रहता , कई बार मन चाहा कि उससे बात करू, मै दिल ही दिल मे उसे चाहने लगा था । लेकिन अचानक कुछ दिनों से वो नज़र नहीं आई, आँखे रोज़ उसे उसी बस स्टैंड पर ढुँढती ,पर पुछु तो किससे , कोई भी कुछ भी नहीं जानता था उसके बारे में ।

एक दिन मैं दोस्तो के साथ किसी होटल मे खाना खाने गया तो अचानक मेरी नज़र सामने के टेबल पर पड़ी वही लड़की लाल सुर्ख जोड़े में गहनों से लदी थी , और उसके साथ एक अधेड़ उम्र का शक्स , दिखने मे कुछ अजीब सा भी था ,हाव-भाव से लग रहा था कि पति-पत्नि हैं , लेकिन लड़की के हाव-भाव से पता चल रहा था कि वो खुश नहीं है । मैने सोचा एक बार मिला जाए लेकिन इतने मे वो उठ कर चले गए और वो लड़की मेरे दिल पर एक छाप छोड़ गई, जो हर समय हँसती रहती थी , वो आज खोई-खोई सी लग रही थी , ना जाने क्या थी उसकी कहानी, एक पहेली सी बन कर रह गई वो लड़की मेरे लिए ।



मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

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गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

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