मत जकड़ो मुझे इस तरह ,छोड़ दो अब तो बहुत हुआ
ना सताओ मुझे बक्श दो अब तुम्हारा ज़ुल्म बहुत हुआ ।
मैं वो इन्सान हूं जिसने नहीं सताया कभी किसी बेजुबान को ,
नहीं कभी प्रकृति को कोई कष्ट पहुंचाया मैंने, तो क्यों दी
जा रही मुझे सज़ा ।
मैंने तो कोई बिमारी नहीं फैलाई , किसी मासूम का कत्ल
नहीं किया , नहीं किसी अबला पर ज़ुल्म किया ,ना ही किसी की
आबरू का कत्ल किया, नहीं किसी के मुंह से छीना निवाला ।
फिर मुझे क्यों दी जा रही है सज़ा , क्यों मुझ पे ये आपदा आई
क्यों मुझ पर डा रहे हो कहर, क्यों बना कठपुतली नचा रहे हो मुझे
बस करो छोड़ दो अब तुम्हें खुदा का वास्ता , अब बहुत हुआ ।
हे ईश्वर अब तो मुझ पर करो रहम , मुझे निकालो इस मकड़ी जाल
से , बस अब बहुत हुआ ।
मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

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