Saturday, December 5, 2020

छोड़ दो अब तो बहुत हुआ-प्रेम बजाज


 


मत जकड़ो मुझे इस तरह ,छोड़ दो अब तो बहुत हुआ 
ना सताओ मुझे बक्श दो अब तुम्हारा ज़ुल्म बहुत हुआ ।

मैं  वो इन्सान हूं जिसने नहीं सताया  कभी किसी  बेजुबान को ,
नहीं कभी प्रकृति को कोई कष्ट पहुंचाया मैंने, तो क्यों  दी 
जा रही मुझे सज़ा ।

मैंने तो कोई बिमारी नहीं फैलाई , किसी मासूम का कत्ल 
नहीं किया , नहीं किसी अबला पर ज़ुल्म किया ,ना ही किसी की 
आबरू  का कत्ल किया, नहीं किसी के मुंह से छीना निवाला ।

फिर मुझे  क्यों दी जा रही है सज़ा , क्यों मुझ पे ये  आपदा आई 
क्यों मुझ पर डा रहे हो कहर, क्यों बना कठपुतली नचा रहे हो मुझे 
बस करो छोड़ दो अब तुम्हें खुदा का वास्ता , अब बहुत हुआ ।

हे ईश्वर अब तो मुझ पर करो रहम , मुझे निकालो इस मकड़ी जाल
से , बस अब बहुत हुआ ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

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