Monday, December 14, 2020

संघर्षों के साथ जीवन यापन की कला-अनुराग ठाकुर

संघर्षों के साथ जीवन यापन की कला


जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है ,हाँ जी संघर्ष ही जीवन है ।संघर्ष! यह एक ऐसा अनुभव है जिससे शायद ही दुनिया का कोई व्यक्ति वंचित रहा होगा। हम सब को बचपन से ही सिखाया जाता हैं कुछ भी पाने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है। बिना संघर्ष कभी कुछ हासिल नहीं कर सकते समाज में प्रतिष्ठा, नाम-शोहरत, रुपया-पैसा, तरक्की या फिर पढ़ाई में अव्वल होना हो, चाहे जो भी लक्ष्य हो उसे प्राप्त करना बिना संघर्ष के संभव नहीं।
इसमें कोई दोराह नहीं की संघर्ष जीवन को तराशता है, निखारता है, सँवारता है और फिर हमें ऐसे साँचे में गढ़ता है जिसकी प्रसंशा दुनिया करते हुए नहीं थकती। शायद यही वो मुकाम या मंजिल होती है जिसके लिए मनुष्य भरशक प्रयास करने से पीछे नही हटता है जिसे हम संघर्ष कहते हैं। इसके पश्चात जो सफलता प्राप्त होती है निसंदेह वो अतुलनीय होती हैं। संघर्ष ही है सफलता की कुंजी है । संघर्ष जीवन के उतार-चढ़ाव का अनुभव कराता है, अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाता हैं, सतत सक्रिय रहना सिखाता है, समय की कीमत सिखाता है जिससे प्रेरित होकर हम सशक्तिकरण के साथ फिर से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते है और जीवन जीने के सही तरीके को सीखते हैं। दुनिया का हर व्यक्ति जीवन में सफलता की उम्मीद करता हैं जिसके लिए वो अथक प्रयास भी करता है। कई बार कुछ अलग करने की चाह और प्रबल प्रेरणा से व्यक्ति अपने मुकाम के करीब पहुँच भी जाता है लेकिन कुछ कठिन संघर्ष को सामने देख सफलता से वंचित हो जाता है।
और वह नहीं जान पाते की उनके साथ ऐसा क्यों हुआ ,जिस कारण उनके सपने अधूरे के अधूरे रह जाते है और जीवन के अंतिम पलों तक उनकी इच्छाएँ आधी-अधूरी रह जाती है। ऐसी इच्छाएँ उन्हें अपने जीवन से निराश के मोड़ पर लाकर के खड़ी कर देती है क्योंकि अधिकांश लोग अपने संपूर्ण जीवन में यह जान ही नहीं पाते की सफलता कैसे हासिल करें । जीवन ‘संघर्ष’ का दूसरा नाम हैं। एक बात हमेशा याद रखिए, अपनी मंजिल का आधा रास्ता तय करने के बाद पीछे ना देखे बल्कि पूरे जुनून और विश्वास के साथ बाकी की आधी दूरी तय करे, बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है। आगे बढ़कर भी अगर सफलता ना मिल पाई तो भी कोई बात नहीं कम से कम अनुभव तो नया होगा। बार-बार हार के भी हिम्मत के साथ अपने टारगेट की तरफ कदम बढ़ाना ही संघर्ष है। अपनी हर असफलता से कुछ सीखिए और निडरता के साथ संघर्ष का दामन थाम के मंजिल की ओर आगे बढ़िए।
जब तक जीवन में संघर्ष नहीं होता तब तक जीवन जीने के अंदाज को, सच्ची खुशी को, आनंद को, सफलता को अनुभव भी नहीं कर सकते। जिस तरह बिना चोट के पत्थर भी भगवान नहीं होता। ठीक उसी तरह मनुष्य का जीवन भी संघर्ष की तपिश के बिना ना तो निखर सकता है, ना शिखर तक पहुँच सकता है और ना ही मनोवांछित सफलता प्राप्त कर सकता है। क्योंकि ”संघर्ष हमारे जीवन का सबसे बड़ा वरदान है और वो हमें सहनशील, संवेदनशील और देवतुल्य बनाता हैं।” जीवन में संघर्ष करते वक्त एक बात का सदैव ध्यान रखें कि लोग आपकी प्रशंसा कर रहे या बुराई क्योंकि ये दुनिया की रीति है यदि आप अपने मन से कुछ अच्छा करने की विचारधारा को लेकर प्रयास करने को लेकर कदम को बढ़ाया यदि आपको उसमें सफलता मिल गई तो आपकी प्रशंसा के अंबार लग जायेंगे वहीं यदि आप किसी कारण वश अपने मुकाम तक नही पहुँच सके तो आपको बुराइयों के साथ साथ ताने सुनने से कोई नही रोक सकता है तो आपको इतना याद रखना है कि आपको उनकी नकारात्मक सोच को पीछे छोड़ अपने तक पहुँचने में फिर से अथक प्रयासों में लग जाना है संघर्ष के इस सूत्र को समझिए और उसपर चलने की कोशिश कीजिए। यकीन मानिए आप जीवन को एक अलग रूप से देखने लगेंगे।

अनुराग ठाकुर (पत्रकार)
                           औरैया-उत्तर प्रदेश

No comments:

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है । तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण ...