Sunday, November 1, 2020

सिनेमा और टीवी को शिकस्त दे रहा तीसरा पर्दा -वीरेन्द्र बहादुर सिंह



कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर के सिनेमा घर बंद हैं। सिनेमा, थिएटर शुरू भी होंगे तो कुछ दिन लोग सिनेमा घरों में जाने से डरेंगे। परंतु कोरोना के आने से पहले ही सिनेमा घरों और मनोरंजन परोसने वाले टीवी चैनलोे को एक तीसरा पर्दा शिकस्त दे रहा है। यह है इंटरनेट का डिजिटल प्लेटफार्म। इसके बारे में जानने से पहले थोड़ा पीछे चलते हैं।
एक जमाना था, जब गांवों में नाटक कंपनियां नौटंकी डेरा-तंबू डाल कर पेट्रोमेक्स के उजाले में नाटक या नौटंकी दिखाती थीं। उस समय इस तरह की नाटक कंपनियां या नौटंकी कंपनियां एक से बढ़ कर एक नाटक दिखाती थीं। उन दिनों मुंबर्द में भी थिएटर का जमाना था। प्रवीण जोशी, सरिता या पद्मा रानी का जमाना था। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी नौटंकी कंपनियां धूम मचाए थीं। फिल्मों के आने के बाद भी सालों तक नाटक-नौटंकी होती रहीं। परंतु मल्टी प्लेक्स और टीवी सैकड़ो चैनल्स के आने के बाद लोगों में नाटक या नौटंकी के प्रति आकर्षण बहुत कम रह गया है।
सिनेमा के आगमन के बाद पहले 35 एमएम की फिल्में प्रदर्शित होती थीं। उसके बाद सिनेमास्कोप आया। ‘शोेले’ जैसी फिल्म 70 एमएम के पर्दे पर रिलीज हुई। इसमें हॉलीवुड में बनी फिल्म ‘मेकेंन्नाज गोल्ड’ एक जबरदस्त एक्शन फिल्म थी। इसमें स्टिरियोफोनिक ध्वनि और अंत में डोल्बी डिजिटल जैसी टेक्निक आई। अब लोगों के हाथों में स्मार्ट फोन आने के बाद बड़े पर्दे का बहुत ज्यादा आकर्घण नहीं रहा। टेलीविजन के आगमन के बाद बड़े पर्दे का महत्व वैसे ही घट गया था, पर अब सिनेमा के बड़े पर्दे और टीवी के छोटे पर्दे के बीच एक नया प्लेटफार्म विकसित हुआ है। डिजिटल पलेटफार्म नाम का यह तीसरा पर्दा अब मैदान में है। अगर आपके घर में स्मार्ट टीवी है और टीवीं इंटरनेट के साथ जुड़ा है तो नेटफ्रिलक्स, अमेजोन प्राइम वीडियो, ऑल्ट बालाजी, जी फाइव, हॉट स्टार जैसे ओटीटी प्लेटफार्म भी अब मनोरंजन के लिए उपलब्ध हैं। ये सभी माध्यम अब एक नई सोच वाला शो लेकर आ रहे हैं, जो दर्शकों में चर्चा का विषय बन रहे हैं। पिछले साल ‘सीक्रेट गेम्स 2’, ‘द फेमिली मैन’, ‘बार्ड आफ ब्लड’, और मेड इन हेलन’ जैसी डिजिटल सिरीजें दर्शकों में खूब प्रिय रहीं। इस तीसरे पर्दे की सफलता को देख कर अब अक्षय कुमार जैसे एक्टर और करण जौहर जैसे बड़े-बड़े निर्माता भी ओटीटी फ्रलेट प्लेटफार्म पर मनोरंजन का मसाला ले कर आ रहे हैं। 2020 के साल में टेलीविजन पर आते परंपरागत धारावाहिकों के सामने यह तीसरे पर्दे का नया माध्यम और मजबूत तथा प्रभावशाली होगा। इस पर बड़े-बड़े शोज और बड़े-बड़े स्टार देखने को मिलेंगे। 
2020 के साल में मनोरंजन का खजाना खोल देने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओटीटी प्लेटफार्म, नेटफ्रिलक्स के संस्थापक और सीईओ रीड हेस्टिग्ंस ने अभी जल्दी ही घोषणा की है कि उनकी कंपनी भारतीय दर्शकों की रुचि के अनुसार भारतीय कंटेंट तैयार करने में जुटी है। उनकी कंपनी भारतीय कंटेंट वाली सिरीज तैयार करने के लिए 7000 करोड़ की रकम खर्च करने को तैयार है।
टाइम्स के ओटीटी डिजिटल प्लेटफार्म एमएक्सप्ले पर अभी जल्दी ही ‘क्वीन’ नामक वेबसिरीज ने खूब दर्शक बटोरे। ‘क्वीन’ की कहानी तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित है। सन् 1990 में मशहूर अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल ने एक टॉक शो में जयललिता से एक घंटे तक बातचीत की थी। जिसमें लेजंडरी पूर्व अभिनेत्री तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने जीवन के तमाम पत्ते खोले थे। उस टॉक शो के बीस साल बाद उसी बातचीत को कहानी के रूप ढ़ाल कर ‘क्वीन’ वेबसिरीज में रूपांतरित किया गया है। इस वेबसिरीज में जयललिता का प्रेम, नफरत और राजनीति में आने की जबरदस्त तड़प को दर्शाया गया है। अलबत्ता ‘क्वीन’ सिरीज मेें ऐसी भी तमाम बाते हैं, जो जयललिता के प्रशंसकों कसो पसंद नहीं आईं। ‘क्वीन’ वेबसिरीज के बदले फिल्म होती तो इसके निर्माता को अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता, क्योंकि फिल्म सिनेमा घर में देखी जा सकती है, जबकि वेबसिरीज इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल फोन या टीवी पर डिजिटल माध्यम से देखी जा सकती है। इस वेबसिरीज में ‘क्वीन’ का रोल रम्या कृष्णन ने किया है।
इसी तरह पिछले साल नेटफ्रिलक्स पर लीला नाम की एक वेबसिरीज रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों ने खूब देखी। यह वेबसिरीज चर्चित भी रही। इसके अलावा ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ के जीवन पर बनी ‘द क्राउन’ नाम की एक वेबसिरीज भी काफी चर्चित रही है। इसमें ब्रिटेन के रॉयल परिवार की तमाम अनकही बातें दिखाई गई थीं। ‘हाउस आफ कार्ड्स’ नाम की एक वेबसिरीज ने अमेरिका के प्रेसीडेंट के वाशिंग्टन के आधिकारिक निवासस्थान व्हाइट हाउस के अंदर की राजनीति की बातें उजागर की गई थीं। हरियाणा की एक महिला पुलिस कांस्टेबल के संघर्ष पर बनी ‘सोनी’ नामक वेबसिरीज भी लोगों ने नेटफ्रिलक्स पर खूब देखी।
देखने वाली बात यह है कि कोई चर्चित फिल्म सिनेमा घरों, थिएटरों में रिलीज होती है औद दर्शकों को उसमें कुछ आपत्तिजनक लगता है तो दर्शक थिएटरों में तोड़फोड़ कर सकते हैं। परंतु इंटरनेट के माध्यम से टीवी या स्मार्ट फोन पर तो सिर्फ देख सकते हैं। भारत में 46 करोड़ इंटरनेट का उपयोग करने वाले हैं।
लोग इस तरह की वेबसिरीज अपने डेस्कटॉप, लैपटॉप, आईपैड या मोबाइल फोन पर ही देख सकते हैं। इस तरह देखा जाए तो यह एक प्रकार का डिजिटल प्लेटफार्म एक नया जादुई बॉक्स है। सवाल यह है कि इस प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली वेबसिरीजों में सेंसरिाप का कोई नियंत्रण संभव नहीं है। ये तमाम प्रकार के नियंत्रणों से बाहर हैं। इसलिए इसमें कोई भी कंटेंट रिलीज किया जा सकता है। किसी के मन को ठेस पहुंचाने वाला भी काम हो सकता है। इसीलिए डिजिटल मीडिया को भी नियंत्रण में लाने की जोरदार मांग हो रही है। भारत में पोर्न साइट्स पर नियंत्रण है, फिर भी लोग उसे देख सकते हैं।
हां, अगर डिजिटल मीडिया स्वच्छंद और अनियंत्रत हो जाए तो यह समाज, देश और आने वाली नई पीढ़ी के लिए अनेक मुश्किलें खड़ी कर सकती है। परंतु ये बात भी एक हकीकत है कि देश में अब इंटरनेट की स्पीड बढ़ रही है, उसके साथ-साथ डिजिटल कंटेंट अन्य मनोरंजन के मुकाबले अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है। वेबसिरीज के निर्माताओं का मानना है कि सन् 2019 का साल डिजिटल इंडस्ट्री के लिए स्वर्ण साल रहा है। इससे यही लगता है कि मनोरंजन का पर्याय बदल रहा है।
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए, सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)

जिंदगी की किताब में ढूँढते फिरोगे-भावना ठाकर(भावु)



कसक जब साथ बिताएं हसीन लम्हों की याद आएगी तब,
ज़िंदगी की किताब के हर पन्नों पर हमसे वाबस्ता इश्क के फ़साने ढूँढोगे।

नादाँ मेरे महबूब अकेले में तड़पते गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढोगे
हम है तो वीरानियों में भी बहार ए चमन है,ना रहेंगे हम तो मौसम ए बारिश की फुहार ढूँढोगे।

जा रहे हे रुख़सत जो दे रहे हो आज अपनी महफ़िल से हंस हंसकर,
कल दिल बहलाने की ख़ातिर हमें लगातार ढूँढोगे।

बेख़बर हो हुश्न ए रौनक के नूर से तुम, उदास रातों में इन आँखों का नशा पाने मैख़ाने की दहलीज़ ढूँढोगे

बरसों का मोह है चंद पलों की दिल्लगी नहीं भूल पाओ तो भूला देना,
भूलाने की कोशिश में हमें और करीब पाओगे
तब अश्क जम जाएंगे ख़्वाबगाह में रोने के बहाने ढूँढोगे।

चाहा है तुम्हें चाहत की हद से गुज़रकर हमने रोम रोम भरकर, साँस साँस छनकर,
ढूँढने पर भी जब नज़र ना आऊँगी तब मचलकर मौत के बहाने ढूँढोगे।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

इंद्रा कंप्यूटर एजूकेशन ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कॉम्पटीशन परीक्षा सम्पन्न हुई

इंद्रा कंप्यूटर एजूकेशन ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कॉम्पटीशन परीक्षा सम्पन्न हुई



सहायल (औरैया)- दिनाँक 1/11/2020 दिन रविवार को सहायल कस्बा में इंद्रा कंप्यूटर एजूकेशन ऑफ़ टेक्नोलॉजी की तरफ से स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज में कॉम्पटीशन परीक्षा करवाई गई। जिसमें परीक्षा प्रभारी स्वतंत्र भारत के प्रबंधक विष्णु चौहान ने मुख्य योगदान दिया व पूर्ण सहयोग रहा बताते चले यह् परीक्षा प्रति वर्ष दो बार करवाई जाती है।इस कॉम्पटीशन परीक्षा करवाने का मुख्य उददेश्य विद्यार्थियों की योग्यता को जांच कर कंप्यूटर सीखने का एक सुनहरा अवसर प्रदान हो सकता है इस परीक्षा में निन्म स्तर की कक्षा से उच्च स्तर की कक्षा तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया, यह परीक्षा सौ अंक की होती है जिसमें अंग्रेजी, गणित, सामान्य ज्ञान के प्रश्नों को पूछा गया ,जिसमें बच्चों के अंकों के हिसाब से उनको प्रतिमाह फीस का प्रावधान  रखा जाएगा, यह परीक्षा प्रति वर्ष में दो बार करवाई जाती थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते कुछ परिस्थितियों को स्थगित कर दिया गया था लेकिन अब इस परीक्षा को करवाने का निर्णय इंद्रा कंप्यूटर के  संरक्षक-अनुराग सिंह ने लिया था जिसमें उन्होंने बताया है कि परीक्षा के समय यथा संभव प्रयास करवाएं जाएंगे जैसे कि बच्चों को मास्क लगाना अनिवार्य किया गया ,दफ़्ती,पेन आवश्यक चीजों को लाना बाकी मोबाइल बगैरा  को परीक्षा के समय लाना वर्जित किया गया ,वहीं परीक्षा के दिन बच्चों को समय से 10मिनट पहले पहुँचने को बोला गया था जिससे कि किसी भी प्रकार की कोई समस्या न हो वहीं पर परीक्षा प्रभारी आर्यन तिवारी परीक्षा की गतिविधियों को नजर में रखते हुए परीक्षा को योजनावद्ध सफल बनाया जिसमें प्रवेश के समय कोविड-19 की जाँच व मास्क व सेनेटाइजर करवाते हुए ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी बिना मास्क प्रवेश वर्जित कर दिया वहीं परीक्षा के समय विद्यालय के हर एक कमरे में बच्चों को मास्क लगाकर ही बैठाया गया जिसमें बच्चों को छह फीट की दूरी पर बैठाया गया था परीक्षा के समय उपस्थित स्टाप में कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संरक्षक विवेक पाल ,विकास कुशवाहा, आदर्श कुमार,अनुरुद्ध शर्मा,ओमी सेंगर,महिमा सेंगर,राधा तिवारी,अनिल ठाकुर,दिलीप राजपूत, प्रेमनारायण राजपूत,मयंक,हेमराज,अमित कुमार,कमलेन्द्र कुमार,सूरज सेंगर आदि ।

Saturday, October 31, 2020

जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाहूबली राजा भैया का जन्मदिन



बिधूना-औरैया -आज जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का जन्मदिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया ,इस अवसर पर कथा हवन पूजन व कन्या भोज के साथ उनकी लम्बी उम्र की कामना की गयी जबकि जनसत्ता दल के पदाधिकारियों द्वारा केक काटकर मिष्ठान वितरण किया गया| कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रधान महासचिव डॉ माधवेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया| कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष औरैया नितेंद्र सिंह सेंगर (गौरव ),जिला प्रधान महासचिव औरैया माधवेंद्र प्रताप सिंह, राजवीर सिंह जिला महासचिव, कुलदीप पुंडीर युवा प्रधान महासचिव औरैया विमल सेंगर जिला जिला अध्यक्ष छात्रसत्ता, परमेंद भदोरिया जिला उपाध्यक्ष विशाल सेंगर युवा जिला महासचिव अभिषेक राठौर जिला उपाध्यक्ष युवा छोटे संखवार अभिषेक राठौर,शिवम् मिश्रा विधानसभा अध्यक्ष युवा पवन राजपूत, अभिनेंद्र राजपूत ,अरविंद पुंडीर पुरवा पट्टी , दीपेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे|

मौन के भी शब्द होते कभी सुनो तो सही-प्रेम बजाज



मौन के भी शब्द होते हैं कभी सुनो तो सही ,
मेरी आंखें माना मौन है , मगर सपने तो वो भी बुनती है ,
तुम कहते हो मैं नहीं चलुंगा तुम्हारे संग इन वादियों में ,
मैं मौन होकर चल देती हूं अकेली ,
तुम कहते हो मैं चलूं तुम्हारे संग हर पथरीली राह पर ,
मैं मौन हो चल देती हूं संग तुम्हारे ,
मौन का अर्थ ये नहीं कि वो पथरीली राहें मुझे चुभती नहीं ,
करते हो तिरस्कार मेरा सरे महफ़िल ,
मैं रह जाती हूं मौन तो क्या मुझे तकलीफ़ नहीं ,
छु लेती हूं तुम्हें तो कर लेते हो किनारा ,
कभी बुझा कर अपनी पिपासा मोड़ लेते हो मुंह ,
कभी तो बन बदरा प्रेम सुधा रस बरसाओ ना ,
प्यासी धरा सी रह जाती हूं मौन तो क्या मेरे अहसास नहीं ?
जिस दिन दे दिए शब्द मैनें अपने मौन को आ जाएगा एक ज़लज़ला ,
बह जाएगा जिसमें सबकुछ , सुनोगे जिस दिन मेरे मौन की गुंज ,
बहरे हो जाओगे मेरे मौन के शब्दों से , इसलिए मुझे मौन रहने
पर इतना मजबूर ना करो , मेरे मौन के शब्द सुनो ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )

करवाचौथ स्पेशल सजना है मुझे सजना के लिए -प्रेम बजाज





.......सजना है मुझे सजना के लिए .............
...................जी हाँ दोस्तो आजकल तो सब के होंठ यही गुनगुना रहे होंगे,
और सब खूब शोपिंग मे बिज़ी होंगे बडी़ लम्बी चौडी़ लिस्ट बना कर ।
.सब की लिस्ट लगभग एक सी ही होती है । सब सखियाँ अपने पिया से यही माँग करती है ।
माथे अपने का तिलक लगा कर चाँद सी इक बिँदिया सजा दो,
सिँदूर के लाल रँग से मेरी पिया तुम माँग भरा दो ।
हीरा, मोती, सोना, चाँदी, कुछ नही चाहिए मुझको साथी ।
काँच की मुझ को चुडी़ ला दो, लज्जा के गहने बना कर, बाँहो की इक कँठी पहना दो ।
नैनो का काजल बने तेरे सपने, होठों की लाली मुस्कराहट को बना दो ।
अरमानो की साडी़ ला दो, स्वाभिमान की चुनर औढा़ दो , प्यार का उसपे गोटा लगा दो ।
प्रेम-बँधन की पायल मै बाँधु, इँद्रधनुष के बिछुए पहना दो ।
इज़्ज़त की इक कार ला दो, उसमे बैठा के सैर करा दो ।
खुशियो के तुम तोहफे ला दो, गिनती उनकी करना ना तुम, बस उनके तुम ढेर लगा दो ।
सात फेरो का वचन निभा दो, अर्धाँगिनी का तुम दर्जा दे दो ।
साथ चलने का हक भी दे दो, कभी ना छोड़ कर जाने का इक वादा दे दो ।
स्वाभिमान से जीना दे दो, अपने घर की इज्ज़त बना दो ।
देखे ना कोई बुरी नज़र से, अपनी नज़र की ढाल बना दो ।
ऐसा मोहे सज दे साँवरिया, लग जाए मोहे तोरी नज़रिया ।
साए के जैसे संग रहुंगी , बन कर दीप तेरी राह में जलुंगी , दुःख- सुख
में सदा मैं संग रहुंगी , प्यार की ठंडी छांव करूंगी ।
लांघ कर आई तेरी चौखट , इस चौखट पर ही प्राण तजुंगी ।


मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)

Friday, October 30, 2020

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो-भावना ठाकर



जीवन का सफ़र पथरीला कंटीला और तप्त है हमसफ़र गर समझदार मिले तो आसानी से कटता है वरना मंज़िल तक पहुँचने से पहले रास्ते उलझ जाते है।
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो।सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो-भावना ठाकरसफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो-भावना ठाकर
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो।
सिर्फ़ बस, ट्रेन या प्लेन में कहीं जाने का नाम ही सफ़र नहीं होता। ज़िंदगी जीना भी एक सफ़र ही तो है। निदा फ़ाज़ली जी की ये रचना ज़िंदगी के सफ़र को परिभाषित कर रही है। धूप छाँव की बयार से उलझते संघर्षों के बिहड़ जंगलों से गुज़रते सबको जीना है।
किसीको बिना संघर्ष किए बैठे बिठाए गद्दी मिल जाती है तो कोई संघर्षो से जूझते हुए शून्य से शुरू करता है। किसीके पास भरे-पूरे परिवार का वितान होता है जिसकी छाँव तले सुकून सभर ज़िंदगी कट जाती है। पर कोई कमनसीब ऐसा भी होता है जिसे ना बरगद की घनी छाँव नसीब होती है नाहि अमलतास की हरियाली बस अनमना सफ़र कट रहा होता है। रिश्तों के सफ़र में भी कहाँ हर रिश्ते को मंज़िल मिलती है। हल्की सी अनबन पर कब सर से आसमान उठ जाएं पता ही नहीं चलता।
पर दांपत्य के सफ़र में जब दो अनदेखे अन्जाने हाथों में हाथ लेकर चल पड़ते है जीवन रथ की डोर थामें तब दोनों तरफ़ से सिरे की तुरपाई पर मजबूती से चाहत के टांके लगाते कड़ी धूप को सहकर भी सफ़र को अंजाम देने की भरपूर कोशिश करते है। धूप से घबरा कर छाँव की चाह में आधा सफ़र नहीं छोड़ते। और जो ज़िंदगी की धूप सह लेते हो वो अपने हिस्से की छाँव बखूबी पा भी लेते है। या तो खुद छाँव उस मुसाफ़िर को ढूँढ लेती है। धूप की तप्त परछाई से बिना डरे जो चलते रहते है उसके साथ उसके नसीब का आदित भी झिलमिलाते सफ़र करता रहता है।
आसान नहीं दांपत्य का सफ़र। खुद के वजूद का चोला उतार कर दूसरे के सांचे में ढ़लना पड़ता है। अपनी पसंद नापसंद को भूलाकर जीवनसाथी को खुश करना पड़ता है। शादी सिर्फ़ रस्म नहीं दो लोगों के जीवन रथ की नींव है जिसे एक सुहाना सफ़र समझकर तय करना जरूरी है। सात फेरों का छोटा सफ़र तय करते और हस्त मिलाप के विधि विधान के साथ वचन लेते चार आँखों की मंज़िल फिर एक होनी चाहिए। यकीन के स्निग्ध तार से बंधे पति पत्नी को हर सुख दु:ख में धूप छाँव सहते एक दूसरे को संभालते चलना है तभी दो दिल लग्नवेदी की अग्नि से शुरू किया हुआ सफ़र चिता की आख़री आँच तक आनंद लेते हुए ख़त्म करते है। वरना तो बस कट रहा होता है।
तभी तो निदा फ़ाज़ली जी की रचना का नायक नायिका को आगाह करते पूछता है सफ़र में धूप तो होगी चल सको तो चलो।
(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

गर्ल चाइल्ड डे-प्रेम बजाज

सुनो-सुनो ए भारत की नारी , नहींं रही अब तु बेचारी क्यों जन्म से पहले ही कोख में बेटी को मार जाता है । तुम भी तो एक बेटी हो तभी गर्भ धारण ...